प्रवासी लोगों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराए राज्य सरकारः उच्च न्यायालय
मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की पीठ ने सुझाव दिया कि राज्य सरकार यह जरूर सुनिश्चित करे कि इस राज्य में प्रत्येक प्रवासी को कम से कम 15 दिन के लिए पृथक परिसरों में रखा जाए जहां भोजन और चिकित्सा सुविधाओं के साथ ही उचित साफ सफाई हो।
प्रयागराज, 15 मई इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश में कोविड-19 को फैलने से रोकने और राज्य में प्रवेश कर रहे प्रवासियों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के संबंध में बृहस्पतिवार को प्रदेश सरकार को कुछ सुझाव दिए।
मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की पीठ ने सुझाव दिया कि राज्य सरकार यह जरूर सुनिश्चित करे कि इस राज्य में प्रत्येक प्रवासी को कम से कम 15 दिन के लिए पृथक परिसरों में रखा जाए जहां भोजन और चिकित्सा सुविधाओं के साथ ही उचित साफ सफाई हो।
इससे पूर्व, सात मई को उच्च न्यायालय ने अधिवक्ता गौरव कुमार गौर द्वारा मुख्य न्यायाधीश को लिखे पत्र को जनहित याचिका के तौर पर संज्ञान में लिया था जिसमें प्रयागराज में कोरोना वायरस से संक्रमित एक व्यक्ति की मृत्यु के मामले को उठाया गया था। पत्र में आरोप लगाया गया है कि इस मामले में लापरवाही बरती गई है।
पीठ ने पृथक केन्द्रों की स्थितियों पर सवाल खड़ा करते हुए कहा, “क्या कारण है कि कोविड-19 वायरस अस्पतालों को साफ सुथरा रखने के राज्य सरकार के विभिन्न आदेशों और निर्देशों के बावजूद ये अस्पताल साफ सुथरे नहीं हैं।”
अदालत ने यह सुझाव भी दिया कि लॉकडाउन के बाद राज्य में प्रवेश कर रहे प्रवासी कामगारों की सूची बनाकर रखी जाए और सरकारी अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
अदालत ने कहा, "उत्तर प्रदेश में अधिकारी लॉकडाउन के बाद इस राज्य में प्रवेश कर रहे ऐसे लोगों- चाहे वे प्रवासी श्रमिक हों या कोई और- की एक सूची बना सकते हैं। सूची बनाए जाने के बाद ऐसे प्रत्येक 400 लोगों पर एक जिम्मेदार अधिकारी की नियुक्ति की जाए।"
अदालत ने कहा, “ऐसे 400 लोगों के समूहों की देखरेख के लिए नियुक्त सभी अधिकारी इन लोगों की सूची अपने पास रखें और मोबाइल नंबर के जरिए उनका हालचाल पूछें।”
अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 18 मई तय की और राज्य सरकार के वकील को इन सुझावों के संबंध में उठाए गए कदमों से अवगत कराने को कहा।
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