देश की खबरें | “प्रवासी कामगारों के इलाज के लिए नीति और नियम बताए प्रदेश सरकार”

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प्रयागराज, 28 मई इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को दूसरे राज्यों से उत्तर प्रदेश आ रहे प्रवासी कामगारों और उनके परिवारों को चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के बारे में नीति और नियम तथा और ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए उपाय बताने को कहा है।

मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा की पीठ ने राज्य सरकार के अधिकारियों को प्रवासी कामगारों एवं उनके परिजनों के पुनर्वास की योजना के बारे में भी बताने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा, “राज्य सरकार द्वारा आजीविका के लिए उत्तर प्रदेश के निवासियों का दूसरे राज्यों में पलायन घटाने के लिए एक संपूर्ण खाका पेश किए जाने की जरूरत है।”

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पीठ ने उच्च न्यायालय के अधिवक्ता रितेश श्रीवास्तव और गौरव त्रिपाठी द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए 26 मई को यह आदेश पारित किया और इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख एक जून, 2020 निर्धारित की।

अदालत ने कहा कि जहां तक सवाल इस जनहित याचिका में श्रमिकों को परिवहन सुविधा और भोजन उपलब्ध कराने की है, उच्चतम न्यायालय एक जनहित याचिका में पहले ही इस मामले पर स्वतः संज्ञान ले चुका है, इसलिए अदालत इस संबंध में राज्य सरकार से कोई स्पष्टीकरण मांगने की इच्छुक नहीं है।

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याचिकाकर्ताओं ने इस याचिका में प्रवासी श्रमिकों की दुर्दशा बताई है और उनके मुताबिक, प्रवासी कामगार दूसरे राज्यों से सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलकर अपने गांव जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश में रोजगार के लिए मूलभूत ढांचा उपलब्ध नहीं होने की वजह से लाखों लोग रोजी रोटी कमाने के लिए दूसरे राज्य जाते रहे हैं।

याचिका में कहा गया है कि इस तरह का पलायन किसी भी तरह गलत नहीं है क्योंकि संपूर्ण भारत एक संघ है, लेकिन जिन राज्यों में ये कामगार काम कर रहे थे, उन राज्य सरकारों का रवैया संघीय ढांचे की भावना के बिल्कुल विपरीत है। इसलिए यह बहुत आवश्यक है कि उत्तर प्रदेश सरकार स्थानीय स्तर पर रोजगार के लिए अपना तंत्र मजबूत करे।

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