विदेश की खबरें | अफगानिस्तान में स्थिरता जरूरी : संरा शरणार्थी प्रमुख

फिलिप्पो ग्रैंडी ने ‘द एसोसिएटेड प्रेस’ के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि दुनिया के सामने मुश्किल विकल्प हैं। उन्होंने कहा कि तालिबान के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा जिस तरह का राजनीतिक रूप से विस्फोटक हालात बनाया जाएगा उस खतरे को लेकर संतुलन बनाने की जरूरत है क्योंकि उससे अलग-थलग पड़ा अफगानिस्तान फिर से हिंसा और अराजकता में घिर जाएगा।

ग्रैंडी ने कहा, “अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को व्यावहारिक संतुलन बनाना होगा, अफगानिस्तान को स्थिर और व्यवहार्य रखने की आवश्यकता है और राजनीतिक विचारों को संतुलित करना होगा, जिसका अर्थ है कि तालिबान के नेतृत्व वाली सरकार का समर्थन करना होगा।”

तालिबान ने 15 अगस्त को अफगानिस्तान में अमेरिका समर्थित सरकार का तख्ता पलटते हुए देश की राजधानी काबुल समेत अधिकतर इलाकों पर कब्जा जमा लिया था। अधिक समावेशी होने के वादों के बावजूद पूरी तरह से तालिबान सदस्यों से बनी एक अंतरिम सरकार बनाने के लिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय समुदाय की आलोचना का सामना करना पड़ा है। दुनिया भर की सरकारों ने कहा है कि वे अफ़ग़ानिस्तान के नए शासकों को तब तक मान्यता नहीं देंगी जब तक कि एक अधिक समावेशी सरकार नहीं बन जाती।

ग्रैंडी ने कहा कि आर्थिक मंदी से बचने के लिये समझौते की तत्काल आवश्यकता है नहीं तो वहां हिंसा और अराजकता जैसे हालात बन सकते हैं जिससे बड़े पैमाने पर पलायन शुरू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि पहले से ही कमजोर अफगान अर्थव्यवस्था के धराशायी होने का अफगानिस्तान के पड़ोसियों और दुनिया भर पर असर पड़ेगा।

उन्होंने कहा, “यह अत्यंत जरूरी है। यह विकास का कोई ऐसा मुद्दा नहीं है जिसके निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले कोई पांच साल तक चर्चा कर सकता है, लेकिन इसके लिए हर किसी की तरफ से समझौते की जरूरत होगी।” उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सरकारों के साथ काम करने के अपने कुछ सख्त नियमों को और अनुकूल बनाना होगा… और तालिबान को भी कुछ समझौते करने होंगे।”

ग्रैंडी ने कहा कि उन्होंने तालिबान सरकार के मंत्रियों से बात की और यह पाया कि उन्होंने उनकी बात को सुना। उन्होंने आपस में कुछ चर्चा की और संकेत दिए की अपनी पिछली सरकार के मुताबिक उनका रुख कम सख्त और कम प्रतिबंधात्मक हो सकता है। ग्रैंडी ने कहा, हालांकि उन्हें (तालिबानियों को) उनके द्वारा किए गए कामों से आंका जाएगा।

उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान की मानवीय जरूरतों को पूरा करने के काम को वैश्विक समर्थन प्राप्त है, जैसा कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा सोमवार को जुटाए गए 1.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर से संकेत मिलता है।

ग्रैंडी ने कहा कि सर्दी के जल्द आने को देखते हुए लोगों को भोजन और आश्रय देने के लिए मानवीय सहायता शीघ्र दी जानी चाहिए।

ऐसे समय में जब दुनिया अफगानिस्तान को मानवीय सहायता प्रदान करने के लिए एकजुट है, एक ऐसे देश में साजोसामान संबंधी चुनौती बहुत बड़ी नजर आती है जहां एक कामकाजी बैंकिंग प्रणाली भी नहीं है। हर दिन, हज़ारों लोग अफगानिस्तान की राजधानी में बैंकों के बाहर इकट्ठा होते हैं इस उम्मीद में कि उन्हें हर हफ्ते जो 200 अमेरिकी डॉलर की रकम निकालने की अनुमति दी गई है वह रकम उन्हें बैंक से मिल जाएगी।

संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि वर्ष के अंत तक 97 प्रतिशत अफगान गरीबी के स्तर से नीचे रह रहे होंगे।

हाल के वर्षों में यहां युद्ध की वजह से 35 लाख लोग विस्थापित हुए हैं तथा करीब पांच लाख और लोग तो महज पिछले महीने ही विस्थापित हुए हैं। कई लोग काबुल के उद्यानों में अस्थायी शिविरों में रह रहे हैं।

एपी

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