जरुरी जानकारी | विदेशों में भाव टूटने से सोयाबीन, पामोलीन में गिरावट
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. विदेशी बाजारों में कमजोर रुख से दिल्ली मंडी में बृहस्पतिवार को सीपीओ एवं पामोलीन तथा सोयाबीन में गिरावट का रुख रहा। दूसरी ओर देश में खुदरा मांग को पूरा करने के लिए छोटी पेराई मिलों की मांग बढ़ने से सरसों तेल तिलहन के भाव में सुधार देखने को मिला। बाकी तेल-तिलहनों के भाव पूर्वस्तर पर बने रहे।
नयी दिल्ली, 28 अक्टूबर विदेशी बाजारों में कमजोर रुख से दिल्ली मंडी में बृहस्पतिवार को सीपीओ एवं पामोलीन तथा सोयाबीन में गिरावट का रुख रहा। दूसरी ओर देश में खुदरा मांग को पूरा करने के लिए छोटी पेराई मिलों की मांग बढ़ने से सरसों तेल तिलहन के भाव में सुधार देखने को मिला। बाकी तेल-तिलहनों के भाव पूर्वस्तर पर बने रहे।
सूत्रों ने कहा कि मलेशिया एक्सचेंज में 0.8 प्रतिशत की गिरावट है जबकि फिलहाल शिकॉगो एक्सचेंज सामान्य रहा। उन्होंने कहा कि विदेशी बाजारों में गिरावट के बीच स्थानीय तेल-तिलहन कीमतों में भी गिरावट आई।
बाजार के जानकारों ने कहा कि इंडोनेशिया ने सीपीओ और पामोलीन पर निर्यात कर में 34 डॉलर प्रति टन की वृद्धि कर दी है और रुपये में यह वृद्धि 255 रुपये प्रति क्विन्टल की है।
सूत्रों ने कहा कि 29 अक्टूबर को आयात शुल्क मूल्य का निर्धारण किया जायेगा और इस शुल्क को खाद्य तेलों के बाजार भाव के हिसाब से निर्धारित किया जाना चाहिये जिससे आयातकों को अपने सौदों को लेकर निश्चिन्तता और आसानी रहती है। इससे तेल की उपलब्धता बढ़ेगी। आयात शुल्क मूल्य को बाजार भाव के अनुरूप रखने की इसलिए भी आवश्यकता है क्योंकि शुल्क दरें पहले ही काफी कम हैं।
सूत्रों ने कहा कि देश में लगभग 5,000 सरसों की छोटी मिलें हैं जो खुदरा मांग को पूरा करती हैं। जाड़े की सरसों मांग बढ़ना शुरु हो गई है और अब इन छोटे तेल मिलों की दैनिक मांग लगभग 60 हजार बोरी से बढ़कर 80,000 बोरी की हो गयी है। मांग बढ़ने के साथ साथ सरसों की उपलब्धता निरंतर कम होती जा रही है। यह उपलब्धता दीपावाली के बाद और कम हो जायेगी। सरसों का जो भी थोड़ा बहुत स्टॉक है वह बड़े किसानों के पास ही रह गया है। सरसों की अगली फसल में लगभग साढ़े चार महीने का समय है क्योंकि बिजाई देर से हुई है।
उन्होंने कहा कि सरकार को तेल कीमतों में गिरावट का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की व्यवस्था करनी चाहिये।
सूत्रों ने कहा कि सोयाबीन की नई फसल की आवक के समय वायदा कारोबार में भाव कम चल रहा है। ऐसा जानबूझकर इसलिए किया जाता है ताकि किसानों को सस्ते में अपनी उपज बेचने के लिए मजबूर किया जा सके। सूत्रों ने कहा कि सरकार को सरसों की ही तरह सोयाबीन के वायदा कारोबार पर रोक लगाना चाहिये ताकि सट्टेबाजों पर अंकुश लगाया जा सके।
उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य को मूंगफली और सोयाबीन पर ‘स्टॉक लिमिट’ (स्टॉक रखने की सीमा) नहीं लगाना चाहिये। महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश ने किसानों के हित के लिए पहले से ही इसे लागू करने से मना कर दिया है।
सूत्रों ने कहा कि देशी तेल पर ‘स्टॉक लिमिट’ लगाने का कोई औचित्य भी नहीं है क्योंकि गरीब उपभोक्ता सोयाबीन और पामोलीन जैसे सस्ते आयातित तेल अपना चुके हैं और इन तेलों पर ‘स्टॉक लिमिट’ लागू नहीं है। सरकार को इन आयातित तेलों के भाव की निगरानी रखनी होगी कि ये उपभोक्ताओं को किस दर पर बेचा जा रहा है और उन्हें गिरावट का लाभ मिल रहा है या नहीं।
नये फसल की आवक के कारण बिनोलातेल में भी गिरावट है। जबकि सामान्य कारोबार के बीच मूंगफली तेल तिलहन के भाव पूर्वस्तर पर रहे।
बाजार में थोक भाव इस प्रकार रहे- (भाव- रुपये प्रति क्विंटल)
सरसों तिलहन - 8,950 - 8,980 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये।
मूंगफली - 6,150 - 6,235 रुपये।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात)- 13,950 रुपये।
मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड तेल 2,040 - 2,165 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 17,940 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 2,705 -2,745 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 2,780 - 2,890 रुपये प्रति टिन।
तिल तेल मिल डिलिवरी - 15,500 - 18,000 रुपये।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 13,950 रुपये।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 13,650 रुपये।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 12,450
सीपीओ एक्स-कांडला- 11,430 रुपये।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 13,500 रुपये।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 12,980 रुपये।
पामोलिन एक्स- कांडला- 11,800 (बिना जीएसटी के)।
सोयाबीन दाना 5,200 - 5,350, सोयाबीन लूज 5,050 - 5,150 रुपये।
मक्का खल (सरिस्का) 3,825 रुपये।
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(The above story first appeared on LatestLY on Oct 28, 2021 08:19 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

