देश की खबरें | तस्करी, अवैध कटाई से भारतीय अगरवुड को खतरा : वैश्विक संरक्षण एजेंसियां
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. सर्वाधिक कीमती लकड़ियों में से एक अगरवुड की भारत में तीन प्रजातियां पाई जाती हैं और इस सबसे महंगी लकड़ी को अवैध कटाई तथा व्यापार के कारण गंभीर खतरा है। दो वैश्विक संरक्षण एजेंसियों द्वारा तैयार एक तथ्यात्मक रिपोर्ट (फैक्टशीट) में यह जानकारी दी गई है।
तिरुवनंतपुरम, 10 फरवरी सर्वाधिक कीमती लकड़ियों में से एक अगरवुड की भारत में तीन प्रजातियां पाई जाती हैं और इस सबसे महंगी लकड़ी को अवैध कटाई तथा व्यापार के कारण गंभीर खतरा है। दो वैश्विक संरक्षण एजेंसियों द्वारा तैयार एक तथ्यात्मक रिपोर्ट (फैक्टशीट) में यह जानकारी दी गई है।
‘ट्रैफिक’ और ‘डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया’ द्वारा ‘अगरवुड: अवैध वन्यजीव व्यापार में भारत की अगरवुड पर फैक्टशीट’ शीर्षक वाली हाल में जारी रिपोर्ट में कहा गया, “2017 और 2021 के बीच असम, दिल्ली और केरल सहित छह राज्यों में 1.25 टन से अधिक अगरवुड और छह लीटर तेल/यौगिकों को कथित तौर पर जब्त किए जाने के साथ भारत में इस कीमती लकड़ी और उसकी अन्य उपजों का अवैध कारोबार जारी रहा है।”
इसमें कहा गया है कि असम, दिल्ली, केरल, महाराष्ट्र, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल ने बहरीन, सऊदी अरब, कुवैत, थाईलैंड और संयुक्त अरब अमीरात में अगरवुड की तस्करी के मामलों की सूचना दी है।
प्रजातियों, दिलचस्प तथ्यों, कानूनी स्थिति और अवैध वन्यजीव व्यापार से खतरों के बारे में जानकारी प्रदान करने वाली इस रिपोर्ट के मुताबिक अगरवुड का व्यापक रूप से अत्यधिक दोहन किया गया जिससे इसके लिये खतरा उत्पन्न हो गया है।
भारत में और भारत से बाहर महत्वपूर्ण मात्रा में इसका कारोबार किया जा रहा है। इसमें कहा गया है कि प्रजातियों का उपयोग इसके मूल्यवान सुगंधित अन्त:काष्ठ (हर्टवुड), 'अगरू' और अगर तेल के स्रोत के लिए किया जाता है, जो इत्र और पारंपरिक दवाओं के लिये सबसे पसंदीदा कच्चा माल है।
इसका उपयोग अस्थमा, पेटदर्द, छाती में जकड़न, दस्त, शरीर में दर्द और गठिया जैसी बीमारियों के इलाज में किया जाता है और यह कैंसर रोधी गुणों के लिए भी जाना जाता है।
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