एजेंसी न्यूज

आयातित कच्चे माल पर लाजिस्टिक्स शुल्क पर छूट नहीं मिलने से परेशान छोटी कागज मिलें

इंडियन एग्रो एंड रीसाइकिल्ड पेपर मिल्स एसोसिएशन (आईएआरपीएमए) ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, वित्त मंत्रालय और जहाजरानी महानिदेशालय (शिपिंग मंत्रालय) को लिखे पत्र में कहा कि सीमा शुल्क अधिकारियों द्वारा सरकारी निर्देश के मुताबिक उन्हें शुल्क से छूट नहीं दिये जाने के कारण छोठी कागज मिलों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है। कच्चा माल उपलब्ध नहीं होने की वजह से उनका उत्पादन कार्य आगे नहीं बढ़ पा रहा है।

आयातित कच्चे माल पर लाजिस्टिक्स शुल्क पर छूट नहीं मिलने से परेशान छोटी कागज मिलें
जमात

नयी दिल्ली, 27 अप्रैल आयातित रद्दी कागज से पैकिंग उत्पाद तैयार करने वाली छोटी कागज मिलों की शिकायत है कि सीमा शुल्क अधिकारी 22 मार्च से 3 मई 2020 तक की लॉकडाउन अवधि के दौरान लॉजीस्टिक्स शुल्क नहीं लेने के सरकार के निर्देश का पालन नहीं कर रहे हैं। इन मिलों ने सरकार से मामले में हस्तक्षेप कर उन्हें शुल्क से छूट दिये जाने का अनुरोध किया है।

इंडियन एग्रो एंड रीसाइकिल्ड पेपर मिल्स एसोसिएशन (आईएआरपीएमए) ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, वित्त मंत्रालय और जहाजरानी महानिदेशालय (शिपिंग मंत्रालय) को लिखे पत्र में कहा कि सीमा शुल्क अधिकारियों द्वारा सरकारी निर्देश के मुताबिक उन्हें शुल्क से छूट नहीं दिये जाने के कारण छोठी कागज मिलों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है। कच्चा माल उपलब्ध नहीं होने की वजह से उनका उत्पादन कार्य आगे नहीं बढ़ पा रहा है।

एसोसियेशन ने कहा है इस समस्या के चलते देश के विभिन्न हिस्सों में इनलैंड कंटेनर डिपो (आईसीडी) और कंटेनर फ्रेट स्टेशनों (सीएफएस) पर रद्दी कागज से लदे लगभग 40,000 कंटेनर अटके पड़े हैं।

एसोसियेशन के मुताबिक, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड और जहाजरानी मंत्रालय के तहत आने वाले जहाजरानी महानिदेशालय दोनों ने देश में सभी बंदरगाहों और सभी प्रधान आयुक्तों एवं मुख्य आयुक्तों को लॉकडाउन अवधि के दौरान 22 मार्च से 3 मई, 2020 तक आयात या निर्यात माल पर जुर्माना, माल को रोकने अथवा भूमि किराया नहीं लेने का आदेश दिया है, लेकिन इसका पालन नहीं किया जा रहा है।

एसोसियेशन के अध्यक्ष प्रमोद अग्रवाल ने कहा, ’कच्चा माल यानी रद्दी कागज नहीं होने के कारण छोटे कागज विनिर्माताओं के लिए और भी परेशानी बढ़ गई है। उन्हें कई तरह के शुल्क, वेतन के साथ-साथ बिजली बिल, प्लांट और कर्मचारियों के सैनिटाइजेशन तथा मिल परिसर में कर्मचारियों के ठहरने की व्यवस्था जैसे बड़े खर्चों को भी देखना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि छोटी कागज मिलों कोविड- 19 के प्रसार को रोकने में सरकार के साथ हर कदम पर मदद कर रही है लेकिन सीमा शुल्क विभाग द्वारा इन मिलों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है। जिससे उनकी समस्या बढ़ गई है।

अग्रवाल ने कहा, ’पेपर मिलों को लॉकडाउन के दौरान खाद्य उत्पादों, दवाओं एवं अन्य आवश्यक उत्पादों की पैकिंग में इस्तेमाल होने वाले पैकेजिंग मैटेरियल बनाने के लिए कच्चे माल (रद्दी कागज) की अत्यंत आवश्यकता है।’

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, लेटेस्टली स्टाफ ने इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया है)

(The above story first appeared on LatestLY on Apr 27, 2020 10:50 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).