मुंबई, 24 जुलाई महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने सोमवार को कहा कि विशेष जांच दल (एसआईटी) उस घटना पर एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगा, जिसमें मुसलमानों के एक समूह ने त्र्यंबकेश्वर मंदिर में प्रवेश करने का प्रयास किया था।
महाराष्ट्र में गृह विभाग संभालने वाले फडणवीस ने विधान परिषद में कहा कि सरकार कुछ परंपराओं का पालन करने के नाम पर किसी को भी अनियंत्रित व्यवहार करने की अनुमति नहीं देगी।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के विधान परिषद सदस्य शशिकांत शिंदे ने सोमवार को इस मुद्दे पर सवाल उठाया।
फडणवीस ने कहा, ‘‘राज्य सरकार किसी के भी द्वारा गैरजिम्मेदाराना व्यवहार करने और परंपराओं के पालन के नाम पर हंगामा खड़ा करने को बर्दाश्त नहीं करेगी। विवाद की जड़ यह है कि त्र्यंबकेश्वर मंदिर में मुस्लिमों द्वारा धूप चढ़ाने की परंपरा अस्तित्व में है या नहीं। मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी अगले एक महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।’’
मुसलमानों के एक समूह द्वारा इस साल मई में भगवान शिव के प्रसिद्ध मंदिर में कथित तौर पर प्रवेश करने की कोशिश की घटना को लेकर एक बड़ा विवाद उत्पन्न हो गया, जिसके बाद सरकार ने एक एसआईटी का गठन किया था।
फडणवीस ने वीडियो फुटेज का हवाला देते हुए कहा कि कुछ लोगों के एक समूह ने त्र्यंबकेश्वर मंदिर परिसर में प्रवेश किया और सेल्फी ली गईं।
भाजपा नेता ने कहा, "कुछ लोगों को अपने फोन से तस्वीर लेते हुए भी देखा गया। इस घटना की पृष्ठभूमि में, मंदिर के ट्रस्टी ने शिकायत की कि ऐसी कोई (धूप चढ़ाने की) परंपरा नहीं है और इस तरह के कृत्य से लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं।’’
फडणवीस ने कहा कि (मई की) घटना के बाद दोनों पक्षों के लोगों के बीच एक बैठक हुई थी। उन्होंने कहा, ‘‘जो लोग (मंदिर) में आए थे, उन्होंने स्वीकार किया है कि उनका भावनाओं को ठेस पहुंचाने का कोई इरादा नहीं था। उन्होंने इसके लिए माफी भी मांगी। अब शांति है।’’
फडणवीस ने कहा कि समूह में शामिल कुछ लोग खुद को मंदिर के उत्तरी दरवाजे तक सीमित रखने के बजाय अंदर गए, सेल्फी ली और कुछ अन्य चीजें कीं।
उन्होंने कहा, ‘‘इससे अनावश्यक रूप से दोनों धर्मों के बीच सांप्रदायिक तनाव पैदा हो गया।’’
फडणवीस ने यह भी कहा कि जिन लोगों के खिलाफ मई 2023 की घटना के संबंध में मामले दर्ज किए गए थे, उन्हें सीआरपीसी 41 (स्थानीय पुलिस थाने के सामने पेश होने के लिए) के तहत नोटिस जारी किया गया है।
उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की आस्था या परंपरा को मानने पर कोई सरकारी रोक नहीं है, सरकार बीच में नहीं आएगी।
उन्होंने कहा, ‘‘हिंदुओं और मुसलमानों के एक-दूसरे के प्रति उदार होने से बेहतर कुछ भी नहीं है। लेकिन अगर किसी स्थान पर परंपराओं के नाम पर कुछ शरारती कृत्यों को बढ़ावा दिया जाता है, तो हमें दोनों पक्षों की भावनाओं को समझने की जरूरत है।’’
फडणवीस ने अपने गृहनगर नागपुर में एक दरगाह के बारे में अपना व्यक्तिगत अनुभव भी साझा किया। उन्होंने कहा, ‘‘कई हिंदू पिछले कई वर्षों से ताजुद्दीन बाबा की दरगाह पर जाते रहे हैं। किसी को इससे कोई दिक्कत नहीं है। वास्तव में, मैंने इसके विकास के लिए कुछ धनराशि दी है।’’
फडणवीस ने कहा कि सभी को एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए, जिसका मतलब होगा कि ‘‘हमें दिए गए संवैधानिक अधिकारों का सच्ची भावना से पालन किया जा रहा है।’’
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