देश की खबरें | सिद्धरमैया ने कर्नाटक विधानसभा का सत्र 15 अक्टूबर तक बढ़ाने की मांग की
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बेंगलुरु, नौ सितम्बर कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता सिद्धरमैया ने बुधवार को मांग की कि 21 सितम्बर से शुरू होने वाले राज्य विधानमंडल के मानसून सत्र को 15 अक्टूबर तक बढ़ाया जाए।
विधानसभा अध्यक्ष विश्वेश्वर हेगड़े कागेरी को संबोधित एक पत्र में, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने भाजपा सरकार पर संसदीय प्रणाली को लगातार "नष्ट" करने का आरोप लगाया।
सिद्धरमैया ने कहा कि सत्र के लिए निर्धारित समय राज्य में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करने के लिए पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने कहा कि नियमों के अनुसार, एक वर्ष में न्यूनतम 60 दिन सदन की बैठक आवश्यक है।
सिद्धरमैया ने कहा, ‘‘आठ दिनों (मानसून सत्र के) में महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करना असंभव है, इसलिए मैं आग्रह करता हूं कि इस सत्र को न्यूनतम तीन सप्ताह तक बढ़ाया जाना चाहिए, यानि कि 15 अक्टूबर तक।’’
उन्होंने अपने पत्र में कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार सत्र के दौरान 20 से अधिक अध्यादेशों सहित 35 से अधिक विधेयक पेश किये जाने हैं।
उन्होंने कहा कि कई मुद्दे हैं, क्योंकि राज्य के लोगों को ऐसी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा जैसा उन्होंने पहले कभी नहीं किया है। लगातार बाढ़ और कोविड-19 महामारी के चलते 6500 से अधिक लोगों की मौत हो गई है।
उन्होंने दावा किया कि राज्य में कानून और व्यवस्था के मुद्दे बार-बार सामने आ रहे हैं और मादक पदार्थ का मामला भी सामने आया है।
विधानमंडल का मानसून सत्र 21 से 30 सितंबर तक यहां विधान सौध में होना है।
सिद्धरमैया ने कहा कि कर्नाटक राज्य विधानमंडल में सरकारी कामकाज संचालन अधिनियम, 2005 के तहत विधानसभा का एक वर्ष में न्यूनतम 60 दिन चलना अनिवार्य है।
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन भाजपा सरकार हमारी संसदीय व्यवस्थाओं को लगातार नष्ट कर रही है। उसका व्यवहार दिखाता है कि वह सत्र केवल नाम के लिए आहूत कर रही है।’’
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