देश की खबरें | राजभवन के बाहर शुभेंदु अधिकारी के धरने की योजना: उच्च न्यायालय ने वैकल्पिक स्थल बताने को कहा

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कोलकाता, 19 जून कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में ‘‘चुनाव-बाद हिंसा’’ के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता शुभेंदु अधिकारी के धरना-प्रदर्शन के लिए राजभवन के बजाय अन्य वैकल्पिक स्थल के चयन की सलाह दी है।

अदालत ने अधिकारी के भाजपा नेता के वकील से वैकल्पिक स्थान सुझाने को कहा। यह धरना पहले यहां राजभवन के बाहर किया जाना था।

राजभवन के सामने धरना देने की मांग करते हुए अधिकारी के वकील ने कहा कि राज्य सरकार के अनुसार, दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 144 के तहत जनसभा करने को लेकर निषेधाज्ञा लागू है, लेकिन खुद सत्तारूढ़ पार्टी ने अक्टूबर 2023 में पांच दिनों तक राजभवन के बाहर धरना दिया था।

न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा ने याचिकाकर्ता के वकील को 21 जून को अगली सुनवाई की तारीख तक वैकल्पिक स्थान सुझाने का निर्देश दिया।

अदालत ने पश्चिम बंगाल के महाधिवक्ता को यह निर्धारित करने का भी निर्देश दिया कि पिछले साल राजभवन के बाहर प्रदर्शन के दौरान निषेधाज्ञा का कथित रूप से उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई थी या नहीं।

अधिकारी के अधिवक्ता बिल्वदल भट्टाचार्य ने दावा किया कि चुनाव के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ कथित हिंसा के विरोध में बुधवार दोपहर से राजभवन के बाहर धरना देने की अनुमति के लिए कोलकाता पुलिस से की गई उनकी प्रार्थना को प्रशासनिक कारणों से अस्वीकार कर दिया गया।

न्यायाधीश द्वारा यह पूछे जाने पर कि कहीं अन्यत्र धरना-प्रदर्शन करने के बजाय राजभवन के सामने प्रदर्शन क्यों किया जाना चाहिए, भट्टाचार्य ने बताया कि इसका उद्देश्य विपक्षी सदस्यों के खिलाफ कथित अत्याचारों के बावजूद संविधान में अटूट विश्वास का संदेश देना है।

अदालत ने कहा कि पुलिस ने प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक स्थल के रूप में राजभवन के पास वाई-चैनल का सुझाव दिया था।

पश्चिम बंगाल सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे महाधिवक्ता किशोर दत्ता ने दोहराया कि इच्छित स्थान निषेधाज्ञा के अधीन है और सीआरपीसी की धारा 144 के तहत पांच या अधिक लोगों के एकत्र होने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व में केंद्र द्वारा पश्चिम बंगाल के मनरेगा बकाया को कथित रूप से रोके जाने के विरोध में राजभवन के बाहर धरना-प्रदर्शन किया था।

भट्टाचार्य ने दावा किया कि उस धरने के दौरान उन्हीं निषेधाज्ञाओं की अनदेखी की गई।

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