ताजा खबरें | निरीक्षण के बाद 143 दवा कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया: सरकार
Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने मंगलवार को कहा कि केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने राज्य लाइसेंसिंग अधिकारियों के साथ मिलकर 162 दवा कंपनियों का जोखिम आधारित निरीक्षण किया और 143 मामलों में कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
नयी दिल्ली, आठ अगस्त स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने मंगलवार को कहा कि केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने राज्य लाइसेंसिंग अधिकारियों के साथ मिलकर 162 दवा कंपनियों का जोखिम आधारित निरीक्षण किया और 143 मामलों में कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
मांडविया ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि 40 मामलों में उत्पादन रोकने का आदेश जारी किया गया है, 66 मामलों में उत्पाद व लाइसेंस रद्द और निलंबित किए गए हैं, 21 मामलों में चेतावनी पत्र जारी किए गए हैं और एक मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही औषधि नियम, 1945 के प्रावधानों के अनुसार तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि विदेश व्यापार महानिदेशालय, वाणिज्य विभाग, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने 22 मई को कफ सिरप (खांसी की दवा) की निर्यात नीति में संशोधन के लिए एक अधिसूचना जारी की, जिसमें कफ सिरप निर्माताओं के लिए एक जून से अपने उत्पादों का निर्यात करने से पहले सरकार द्वारा अनुमोदित प्रयोगशाला से विश्लेषण का प्रमाण पत्र प्राप्त करना अनिवार्य कर दिया गया है।
मांडविया ने कहा कि तदनुसार, खांसी की 900 से अधिक दवाओं के नमूनों का विश्लेषण किया गया है और विश्लेषण प्रमाण पत्र (सीओए) जारी किया गया है।
देश में औषधियों के विनिर्माण, बिक्री और वितरण को औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 और नियम, 1945 के उपबंधों के अंतर्गत विनियमित किया जाता है।
देश में औषधियों के विनिर्माण, बिक्री और वितरण पर विनियामक नियंत्रण संबंधित राज्य सरकारों के लाइसेंसिंग प्राधिकरणों द्वारा किया जाता है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि निर्माताओं को देश में बिक्री और वितरण के लिए किसी भी दवा के निर्माण की खातिर उक्त अधिनियम और नियमों के तहत दिए गए लाइसेंस की शर्तों का पालन करना आवश्यक है।
जब औषधियों की गुणवत्ता अथवा सुरक्षा से संबंधित मामलों की सूचना प्राप्त होती है तो आवश्यक कार्रवाई के लिए मामले को राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण (एसएलए) के साथ उठाया जाता है।
उन्होंने कहा कि एसएलए को ऐसे लाइसेंस की किसी भी शर्त के उल्लंघन पर कार्रवाई करने का कानूनी अधिकार है, जिसमें उपयुक्त अदालत में मुकदमा चलाना भी शामिल है।
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