देश की खबरें | मिट्टी की मूर्तियां बनाने के लिए विख्‍यात मोलेला गांव में शिल्पग्राम का निर्माण किया जाएगा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. मिट्टी से लोक देवी-देवताओं की मूर्तियां बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विख्यात राजस्थान के मोलेला गांव में अब शिल्पग्राम (शिल्पबाड़ी) की स्थापना की जाएगी। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गांव में शिल्‍पग्राम की स्थापना और अन्य कार्यों के लिए 2.55 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है।

जयपुर, एक जून मिट्टी से लोक देवी-देवताओं की मूर्तियां बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विख्यात राजस्थान के मोलेला गांव में अब शिल्पग्राम (शिल्पबाड़ी) की स्थापना की जाएगी। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गांव में शिल्‍पग्राम की स्थापना और अन्य कार्यों के लिए 2.55 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है।

एक सरकारी प्रवक्‍ता ने बताया कि गहलोत के इस निर्णय से मोलेला के शिल्पकर्मी न सिर्फ अपनी कलाकृतियों का प्रदर्शन और बिक्री कर सकेंगे, बल्कि भावी पीढ़ियों को भी इस कला का प्रशिक्षण दे पाएंगे।

प्रवक्ता ने उम्मीद जताई कि शिल्पग्राम की स्थापना से युवाओं में कला के प्रति आकर्षण बढ़ेगा। उन्होंने बताया कि शिल्पबाड़ी में सेमिनार हॉल, प्रदर्शनी हॉल, कैफेटैरिया व अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

उल्‍लेखनीय है कि मोलेला गांव राजसमंद की खमनोर तहसील में है। यहां के मृण शिल्पकार लोक देवी-देवताओं का मिट्टी में रूपांकन करते हैं, जिसे मेवाड़ के साथ ही गुजरात और मध्य प्रदेश की सीमाओं पर स्थित आदिवासी गांव के लोग खरीदते हैं।

वे इन मूर्तियों को गांव के देवघरों में विधि-विधान से स्थापित कर धार्मिक परंपरा का निर्वाह करते हैं। इन मूर्तियों की खरीद अब घरों में सजावट के लिए भी हो रही है। बदलते परिवेश में कलाप्रेमियों की इच्छाओं के अनुसार कलाकारों ने आधुनिक कलाकृतियों का निर्माण भी शुरू कर दिया है।

टेराकोटा कला राजस्थान की प्रसिद्ध हस्तकलाओं में से एक है। लाल मिट्टी को पकाकर सजावट का सामान बनाने की कला टेराकोटा कला कहलाती है। मिट्टी की फड़ और मांदल नामक वाद्य यंत्र मोलेला गांव में ही बनते हैं। मोलेला गांव के शिल्पकार देश-दुनिया में कला की छाप छोड़ चुके हैं। इन्हें पद्मश्री सहित अन्य राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है।

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