देश की खबरें | आंध्र प्रदेश की कडपा सीट पर शर्मिला की उम्मीदवारी ने पारिवारिक कलह को राजनीतिक लड़ाई में बदला

अमरावती, तीन अप्रैल आंध्र प्रदेश की कडपा लोकसभा सीट पर चुनावी जंग बेहद दिलचस्प होती दिखाई दे रही है, जहां कांग्रेस की प्रदेश इकाई की अध्यक्ष वाई.एस. शर्मिला मौजूदा युवजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के सांसद और अपने चचेरे भाई वाई.एस. अविनाश को चुनाव मैदान में चुनौती दे रही हैं।

अविनाश रेड्डी, पूर्व मंत्री और मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी के चाचा विवेकानंद रेड्डी की हत्या के मामले में आरोपी हैं।

विवेकानंद रेड्डी पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत वाई.एस. राजशेखर रेड्डी के छोटे भाई थे।

कडपा लोकसभा सीट पर वाई.एस. परिवार का एकछत्र राज रहा है और पिछले दशकों में जगन, वाईएस राजशेखर रेड्डी और विवेकानंद रेड्डी कई मौकों पर इस सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

शर्मिला, जगन की छोटी बहन हैं। कडपा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने के शर्मिला के फैसले ने पारिवारिक कलह को अब पूरी तरह से राजनीतिक लड़ाई में तब्दील कर दिया है।

तेलंगाना की राजनीति से अपना राजनीतिक करियर शुरू करने के बाद शर्मिला ने अपनी पार्टी वाईएसआर तेलंगाना पार्टी का कांग्रेस में विलय कर दिया और अब उन्होंने अपना सारा ध्यान आंध्र प्रदेश पर स्थानांतरित कर लिया है।

शर्मिला को राज्य इकाई की प्रमुख नियुक्त किया गया। आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले 15 मार्च, 2019 को विवेकानंद रेड्डी की हत्या हुई और यह मामला अब भी एक विवादास्पद मुद्दा बना हुआ है। इस पर सुनवाई फिलहाल हैदराबाद की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) अदालत में चल रही है।

शर्मिला ने विवेकानंद रेड्डी की बेटी सुनीता नारेड्डी को उनके पिता के हत्यारों को न्याय के कटघरे में लाने के लिए अपना समर्थन देने का वादा किया है जबकि जगन ने तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) सुप्रीमो एन चंद्रबाबू नायडू पर उनकी बहनों को उनके खिलाफ विद्रोह के लिए उकसाने का आरोप लगाया है।

कडपा से लोकसभा चुनाव लड़ने की घोषणा करते हुए शर्मिला ने कहा कि यह कोई आसान फैसला नहीं था और वह इस बात को भलीभांति जानती है कि इससे उनके परिवार में टूट होगी।

शर्मिला ने जोर देते हुए कहा कि उनके मन में अपने बड़े भाई जगन के लिए 'किसी प्रकार की कोई नफरत नहीं' है। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री बनने के बाद जगन एक बदले हुए व्यक्ति हैं।

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