देश की खबरें | शरद पवार ने राकांपा के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल, सांसद तटकरे को किया निष्कासित

मुंबई, तीन जुलाई राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने अपने कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल और लोकसभा सदस्य सुनील तटकरे को ‘पार्टी विरोधी’ गतिविधियों के चलते सोमवार को निष्कासित कर दिया।

इन दोनों नेताओं ने अजित पवार की बगावत में उनका साथ दिया है।

राकांपा प्रमुख शरद पवार ने यह कदम अजित पवार के एकनाथ शिंदे-भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार में बतौर उपमुख्यमंत्री शामिल होने के बाद उठाया है। अजित पवार के साथ आठ अन्य विधायकों ने भी रविवार को मंत्री पद की शपथ ली थी, जिनमें तटकरे की बेटी अदिति भी शामिल हैं।

उल्लेखनीय है कि पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने शरद पवार को पत्र लिखकर दोनों सांसदों को उनकी संसद सदस्यता से अयोग्य घोषित कराने के लिए कदम उठाने की मांग की है।

शरद पवार ने ट्वीट किया, ‘‘मैं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के नाते पार्टी विरोधियों गतिविधियों को लेकर सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल के नाम राकांपा सदस्यों की पंजी (रजिस्टर) से हटाने का आदेश देता हूं।’’

साथ ही, उन्होंने राज्यसभा सदस्य पटेल को भी ट्वीट में ‘टैग’ किया, जिन्हें पिछले महीने ही राकांपा का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था। पवार ने तटकरे को भी अपने ट्वीट में ‘टैग’ किया है।

बाद में, राकांपा प्रमुख ने पटेल और तटकरे को नोटिस जारी किया तथा कहा कि उनके कृत्य पार्टी की प्राथमिक सदस्यता के लिए उन्हें अयोग्य करार दिये जाने लायक हैं।

पवार ने आरोप लगाया कि उनकी जानकारी और सहमति के बगैर नौ विधायकों का बगावत में साथ दिया गया। उन्होंने बाद में कहा, ‘‘अजित और पार्टी के निर्देश का उल्लंघन कर मंत्री के रूप में शपथ लेने वाले आठ अन्य विधायकों का समर्थन करने का आपका कृत्य पार्टी विरोधी गतिविधि के समान है।’’

पवार ने कहा, ‘‘आपके कृत्यों के मद्देनजर मैं पार्टी सदस्यों की पंजी से आपका नाम हटा रहा हूं।’’

इससे पहले, राकांपा प्रमुख को लिखी चिट्ठी में बारामती से लोकसभा सदस्य सुले ने कहा, ‘‘मैं आपको यह सूचित करने के लिए यह पत्र लिख रही हूं कि राकांपा के दो सांसदों-प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे ने हमारे पार्टी संविधान और नियम का उल्लंघन किया है और महाराष्ट्र सरकार में नौ विधायकों को शपथ दिलाने में मदद कर पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त रहे हैं।’’

सुले ने लिखा, ‘‘उन्होंने इस बारे में खुले तौर पर मीडिया के समक्ष बयान दिया और पार्टी के निर्देशों और सिद्धांतों का पूरी तरह से उल्लंघन किया। मैं आपसे अनुरोध करती हूं कि भारतीय संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत संसद की सदस्यता से उन्हें अयोग्य घोषित कराने के लिए सक्षम प्राधिकार के समक्ष अर्जी देने सहित उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए।’’

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