देश की खबरें | एमएसआरटीसी प्रदर्शन के सिलसिले में सात और व्यक्ति गिरफ्तार
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मुंबई, नौ अप्रैल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के अध्यक्ष शरद पवार के दक्षिण मुंबई स्थित सिल्वर ओक आवास के बाहर प्रदर्शन करने के सिलसिले में पुलिस ने सात और लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि अब तक इस मामले में 110 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (एमएसआरटीसी) के हड़ताली कर्मचारियों ने शुक्रवार को पवार के आवास के बाहर प्रदर्शन किया था और आरोप लगाया था कि वयोवृद्ध नेता उनकी मदद करने के लिए कुछ नहीं कर रहे हैं।
पुलिस ने एमएसआरटीसी के हड़ताली कर्मचारियों के अधिवक्ता गुणरत्न सदावर्ते समेत 103 लोगों को शुक्रवार को गिरफ्तार किया था।
एमएसआरटीसी के हड़ताली कर्मचारियों के एक समूह ने शुक्रवार को राकांपा प्रमुख शरद पवार के घर के बाहर अचानक व जोरदार विरोध प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि पवार ने उनके मुद्दों को सुलझाने के लिये कुछ नहीं किया।
पवार अपने आवास के अंदर ही रहे, उनकी बेटी और लोकसभा सदस्य सुप्रिया सुले ने प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की लेकिन वे नहीं माने। प्रदर्शनकारियों की संख्या सौ से ज्यादा थी।
शुरू में प्रदर्शनकारियों के वहां जुटने से हैरान दिख रही पुलिस अंततः अधिकांश प्रदर्शनकारियों को मौके से हटाने में कामयाब रही और 107 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया।
प्रदर्शनकारियों में महिलाएं भी शामिल थीं। उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री पवार के खिलाफ नारेबाजी की और उनमें से कुछ लोगों को उनके आवास की ओर जूते-चप्पल फेंकते भी देखा गया।
पुलिस अधिकारी ने कहा, "मुंबई पुलिस ने राकांपा प्रमुख शरद पवार के आवास पर हमले के सिलसिले में अब तक 110 लोगों को गिरफ्तार किया है।"
इस बीच, पुलिस ने मुंबई में शरद पवार के आवास और पुणे जिले में उनके गृहनगर बारामती स्थित आवास की सुरक्षा बढ़ा दी है।
एमएसआरटीसी में 90 हजार से ज्यादा कर्मचारी हैं और वे खुद को राज्य सरकार के कर्मचारी का दर्जा देने और निगम के विलय की मांग को लेकर नवंबर 2021 से हड़ताल पर हैं। पवार की पार्टी राज्य में सत्तारूढ़ गठबंधन (शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस) का हिस्सा है लेकिन परिवहन विभाग शिवसेना के अनिल परब के पास है।
बंबई उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को हड़ताली कर्मचारियों को 22 अप्रैल तक काम पर लौटने का निर्देश दिया था। अदालत के आदेश के बाद परिवहन मंत्री ने आश्वासन दिया था कि उच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर काम पर लौटने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
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