शहर के आपातकालीन स्थिति निरीक्षण कार्यालय के प्रमुख कॉन्स्टेंटिन अमारैंडी ने कहा कि सभी मृतक संक्रामक रोगों के कोन्स्तांता अस्पताल की गहन चिकिस्ता इकाई में भर्ती थे।
गृह मंत्री लुसियन बोडे ने शुक्रवार को बताया कि ‘गलती’ से मृतकों की संख्या शुरुआत में नौ बताई गई थी। उन्होंने कहा,‘‘ हम सात लोगों की मौत के बारे में बात कर रहे हैं... इनमें से पांच की मौत अस्पताल में और दो की मौत दूसरे अस्पताल में ले जाते वक्त हुई।’’
स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बयान में बताया कि अस्पताल की चिकित्सा इकाई में 113 मरीज थे और सभी जिंदा बचे मरीजों को निकाल लिया गया है। मंत्रालय ने बताया कि मध्याह्न तक आग बुझा ली गई थी, लेकिन आग के कारणों की अब तक जानकारी नहीं मिली है।
राष्ट्रपति क्लाउस इओहानिस ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा कि रोमानिया राज्य ‘‘नागरिकों की रक्षा करने के अपने मौलिक मिशन में असफल रहा। मैं इस हादसे से संत्रस्त हूं जो आज सुबह संक्रामक रोगों के कोन्स्तांता अस्पताल में हुआ।’’
उन्होंने कहा, ‘‘भयानक घटनाचक्र है जो रोमानिया की स्वास्थ्य अवसंरचना की कमी की पुष्टि करता है।’’राष्ट्रपति ने कहा कि रोमानिया की ‘पुरानी पड़ चुकी’ स्वास्थ्य प्रणाली पर महामारी से ‘अकल्पनीय दबाव’ पड़ा है।
रोमानिया में कोविड-19 के मामलों में तेजी से वृद्धि होने से अस्पताल में भर्ती होने वाली मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है जिसकी वजह से देश के अस्पतालों को अधिकतम क्षमता से संचालित किया जा रहा है।
रोमानिया में बृहस्पतिवार को कोविड-19 महामारी शुरू होने के बाद से सबसे अधिक दैनिक मामले आए। देश में बृहस्पतिवार को कोविड-19 से 12,032 लोगों के संक्रमित होने की पुष्टि हुई।
यूरोपीय संघ में रोमानिया स्वास्थ्य सेवा पर सबसे कम खर्च करने वाला देश है। यहां के सकल घरेलू उत्पादन का 5.2 प्रतिशत स्वास्थ्य पर खर्च होता है जबकि यूरोपीय संघ का औसत खर्च 10 प्रतिशत है।
1.9 करोड़ की आबादी वाले यूरोपीय संघ के देश रोमानिया में पिछले एक साल के भीतर दो अन्य अस्पताल में घातक आग लग चुकी है, जिसने देश के पुराने अस्पतालों के बुनियादी ढांचों के बारे में चिंताएं बढ़ा दी हैं।
पिछले नवंबर में, उत्तरी शहर पियात्रा नीमत में कोविड-19 रोगियों के लिए गहन देखभाल इकाई में आग लगने से 10 लोगों की मौत हो गई थी। जनवरी में एक और आग ने बुखारेस्ट के मातेइ बाल्स अस्पताल के एक वार्ड को अपनी चपेट में ले लिया था, जिसमें कम से कम पांच लोग मारे गए थे।
मातेइ बाल्स की आग के बाद, राष्ट्रपति क्लाउस इओहानिस ने तत्काल और ‘गहन’ सुधार का आह्वान किया था। उन्होंने कहा था कि इस तरह की त्रासदी ‘‘फिर से नहीं होनी चाहिए।”
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