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देश की खबरें | कैदियों की रिहाई के लिये कमेटी गठित करना सरकार की उदारता को दिखाता है : अदालत

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. बम्बई उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि कोरोना वायरस महामारी के बीच जेलों में भीड़ से बचने के लिये विचाराधीन एवं अन्य कैदियों की रिहाई के लिये उच्चाधिकार प्राप्त कमेटी गठित करना, सरकार की उदारता को दर्शाता है।

देश की खबरें | कैदियों की रिहाई के लिये कमेटी गठित करना सरकार की उदारता को दिखाता है : अदालत

मुंबई, तीन जुलाई बम्बई उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि कोरोना वायरस महामारी के बीच जेलों में भीड़ से बचने के लिये विचाराधीन एवं अन्य कैदियों की रिहाई के लिये उच्चाधिकार प्राप्त कमेटी गठित करना, सरकार की उदारता को दर्शाता है।

उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता एवं न्यायमूर्ति एन जे जामदार की खंडपीठ ने कहा कि कोविड—19 महामारी के दौर में हर कैदी अस्थायी जमानत पर रिहा होने के अधिकार का दावा नहीं कर सकता है।

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अदालत, प्रीति कार्तिक प्रसाद की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी । याचिका में उच्चाधिकार प्राप्त समिति के विभिन्न आदेशों को चुनौती दी गयी है जिनमें यह कहा गया है कि गंभीर अपराधों, विशेष अधिनियमों के आरोपियों अथवा सजायाफ्ता कैदियों को जमानत परा रिहा नहीं किया जा सकता है।

याचिकाकर्ता का पति जेल में है और उसके खिलाफ महाराष्ट्र प्रोटेक्शन ऑफ इंटरेस्ट ऑफ डिपॉजिटर्स (एमपीआईडी) अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला लंबित है।

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समिति के आदेशों के अनुसार, उन सभी कैदियों को, जिन्हें सात साल तक की जेल की सजा दी गई है अथवा ऐसे मामलों में गिरफ्तार किया गया है उन्हें पैरोल अथवा अस्थायी जमानत पर रिहा किया जा सकता है ।

समिति ने हालांकि, कहा है कि ऐसे कैदी जिन्हें हत्या एवं विशेष प्रावधानों जैसे मकोका, एमपीआईडी, यूएपीए, पीएमएलए के अधीन आरोपित किया जा चुका है अथवा सुजा सुनायी जा चुकी है उन्हें कोरोना वायरस महामारी के आलोक में अस्थायी जमानत पर रिहा नहीं किया जायेगा ।

समिति ने कहा है कि इन कैदियों को रिहा होने के लिये संबंधित अदालत से संपर्क कर नियमित जमानत लेनी होगी ।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता समीर वैद्य ने तर्क दिया कि कमेटी का यह रवैया भेदभाव वाला है, जिसमें इसने यह व्यवस्था दी है कि कौन कैदी राहत के लिये दावा कर सकता है और कौन नहीं ।

पीठ ने शुक्रवार को कहा कि समिति के पास निर्णय करने का अधिकार है और अगर समिति के निर्णय के अनुसार अगर कोई विशेष कैदी रिहा नहीं हो पाता है तो इसमें कुछ नहीं किया जा सकता है।

मामले की सुनवाई अब 14 जुलाई को होगी ।

रंजन

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(The above story first appeared on LatestLY on Jul 03, 2020 05:49 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).