देश की खबरें | दिल्ली विधानसभा 'फेलो' की सेवाएं समाप्त न की जाये, मानदेय दिया जाये: उच्च न्यायालय

नयी दिल्ली, 21 सितंबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को निर्देश दिया कि दिल्ली विधानसभा अनुसंधान केंद्र में 'फेलो' की सेवाएं छह दिसंबर तक जारी रहेंगी और उन्हें मानदेय भी दिया जायेगा।

विधानसभा सचिवालय ने इन फेलो का अनुबंध समाप्त कर दिया था।

न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने 17 ऐसे 'फेलो' की याचिका पर दिल्ली विधानसभा सचिवालय के साथ-साथ सेवा और वित्त विभागों से अपना रुख स्पष्ट करने को कहा।

अदालत ने निर्देश दिया, ‘‘सुनवाई की अगली तारीख तक याचिकाकर्ताओं की सेवाएं समाप्त न की जाएं और याचिकाकर्ताओं को मानदेय दिया जाए। दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल किया जाए। मामले को छह दिसंबर के लिए सूचीबद्ध किया जाता है।’’

अदालत ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष ने पहले कहा था कि याचिकाकर्ताओं की सेवाओं पर बर्खास्तगी के कारण लागू नहीं होते, और इस रुख में बदलाव पर स्पष्टीकरण मांगा।

अदालत ने कहा, ‘‘प्रतिवादियों को यह बताने के लिए नोटिस जारी करें कि प्रतिवादी नंबर 1 (विधानसभा सचिवालय) के रवैये में अचानक यह बदलाव क्यों आया।’’

याचिकाकर्ताओं के वकील ने दलील दी कि जिन फेलो को उचित प्रक्रिया का पालन करने के बाद नियुक्त किया गया था, उनकी सेवाएं पांच जुलाई को सेवा विभाग द्वारा जारी एक पत्र के जरिये मनमाने और अवैध तरीके से समय से पहले समाप्त कर दी गईं थी।

याचिका में कहा गया है कि पांच जुलाई के पत्र में निर्देश दिया गया है कि याचिकाकर्ताओं की सेवाओं को समाप्त कर दिया जाये और इसके लिए उपराज्यपाल की पूर्व मंजूरी नहीं ली गई थी।

इसमें कहा गया है कि बाद में इस फैसले पर रोक लगा दी गई और विधानसभा अध्यक्ष ने ‘‘उपराज्यपाल को सूचित किया कि उन्होंने सचिवालय के अधिकारियों को उनकी मंजूरी के बिना मामले में कोई कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया’’, लेकिन उन्हें उनके मानदेय का भुगतान नहीं किया गया।

याचिका में कहा गया है, ‘‘अगस्त, 2023 के पहले सप्ताह के आसपास उन्हें कुछ विभागों द्वारा अपनी उपस्थिति दर्ज करने से रोक दिया गया था। इसके बाद नौ अगस्त, 2023 के आदेश के जरिये उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गई।’’

याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि उनके मानदेय का भुगतान न करना और उनकी सेवाओं को समाप्त करना उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

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