नयी दिल्ली, 11 अगस्त भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने बेहतर पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कुछ निश्चित श्रेणी के विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के लिए खुलासा जरूरतों को बढ़ा दिया है। इसके तहत इन एफपीआई को स्वामित्व और आर्थिक हित का ब्योरा देना होगा।
इसके अलावा नियामक ने एफपीआई के लिए पात्रता मानदंड से संबंधित कुछ नियमों में बदलाव भी किया है।
सेबी की नियमों में संशोधन के बारे में जारी अधिसूचना के अनुसार, ‘‘बोर्ड द्वारा तय पात्रता मानदंडों को पूरा करने वाले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को समय-समय पर स्वामित्व रखने वाले, आर्थिक हित या नियंत्रण रखने वाले व्यक्ति से संबंध के बारे सूचना या दस्तावेज देना होगा।’’
यह सूचना या दस्तावेज सेबी द्वारा निर्धारित तरीके से देनी होगी।
इससे पहले नियामक ने मार्च में एफपीआई में लाभ वाले वाले मालिकों (बीओ) की पहचान के लिए धन शोधन रोधक (पीएमएल) नियम के तहत सीमा में संशोधन किया गया था। इसके बाद कंपनियों और न्यासों के लिए यह सीमा 10 प्रतिशत और भागीदारों और व्यक्तियों के निकाय के लिए 15 प्रतिशत की गई थी।
बीओ के पास अंतत: एफपीआई का स्वामित्व या नियंत्रण रहता है और इनकी पहचान पीएमएल नियमों के तहत होती है।
सेबी ने इन नियमों को एफपीआई के पात्रता मानदंड के अनुरूप संशोधित किया है। यह बदलाव पीएमएल नियमों के तहत किया गया है।
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