जरुरी जानकारी | सेबी ने पोर्टफोलियो प्रबंधकों के ग्राहकों के लिए डिजिटल रूप से जुड़ने की प्रक्रिया को बनाया आसान

नयी दिल्ली, तीन मई पूंजी बाजार नियामक सेबी ने शुक्रवार को पोर्टफोलियो प्रबंधकों के ग्राहकों के लिए डिजिटल रूप से जुड़ने की प्रक्रिया को आसान बनाया। इस कदम का उद्देश्य कारोबार सुगमता को बढ़ाना है।

पोर्टफोलियो प्रबंधकों को ग्राहकों को शामिल करते समय यह सुनिश्चित करना होगा कि नए ग्राहक टाइप किए गए या इलेक्ट्रॉनिक रूप से लिखे गए नोट का इस्तेमाल करें। यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उन्होंने शुल्क संरचना को समझ लिया है न कि वर्तमान व्यवस्था जिसमें ग्राहकों खुद से इस बारे में लिखकर देता है।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने एक परिपत्र में कहा कि डिजिटल तरीके से जुड़ने को आसान बनाने के उद्देश्य से किया गया यह बदलाव एक अक्टूबर से प्रभावी होगा।

यह कदम ऐसे समय उठाया गया जब सेबी ने समझौतों में शुल्क के अनुलग्नक पर हस्तलिखित नोट की आवश्यकता के अनुपालन में कुछ परिचालन संबंधी चुनौतियां पायी।

सेबी ने कहा, ‘‘ ग्राहक को जोड़ते समय पोर्टफोलियो प्रबंधक को यह सुनिश्चित करना होगा कि नए ग्राहक ने फीस तथा शुल्क के अनुलग्नक पर अलग से हस्ताक्षर किए हैं। साथ ही यदि ग्राहक भौतिक माध्यम से शामिल हुआ है तो उसने फीस व शुल्क की संरचना को हस्तलिखित रूप में समझ लिया है। यदि ग्राहक डिजिटल माध्यम से शामिल हुआ है तो उसने कीबोर्ड का उपयोग करके टाइप किया है, या उंगलियों/स्टाइलस पेन का इस्तेमाल करके इलेक्ट्रॉनिक रूप से लिखा गया है।’’

इसके अलावा, नियामक ने कहा कि डिजिटल माध्यम से ग्राहकों को शामिल करने की मानक प्रक्रिया उद्योग निकाय एसोसिएशन ऑफ पोर्टफोलियो मैनेजर्स इन इंडिया (एपीएमआई) द्वारा बाजार नियामक के परामर्श से निर्धारित की जाएगी।

सेबी ने कहा कि पोर्टफोलियो प्रबंधकों को शुल्क गणना का विवरण देने वाला अनुलग्नक उपलब्ध कराना होगा।

पोर्टफोलियो प्रबंधक-ग्राहक संबंध के महत्वपूर्ण पहलुओं को समझने में आसानी के लिए, सेबी ने पोर्टफोलियो प्रबंधक से अपने ग्राहक को ‘सबसे महत्वपूर्ण नियम व शर्तें’ दस्तावेज के रूप में भी उपलब्ध कराने को कहा है। इसकी ग्राहकों को विधिवत पुष्टि करना आवश्यक है।

सेबी ने बृहस्पतिवार को पीएमएस (पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज) वितरकों के लिए एपीएमआई के साथ पंजीकरण अनिवार्य बनाकर उनकी सामूहिक निगरानी को बढ़ावा देने का फैसला किया था।

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