नयी दिल्ली, 20 दिसंबर केंद्र सरकार ने बुधवार को राज्यसभा को बताया कि केंद्र ने पिछले पांच वर्ष के दौरान अनुसूचित जनजाति के 1,03,34,708 (1.03 करोड़) छात्रों को प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति प्रदान की है।
उसके मुताबिक इस अवधि के दौरान अनुसूचित जनजाति (एसटी) के 68,74,363 (68.74 लाख) छात्रों को पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति प्रदान की गई।
जनजातीय मामलों के केंद्रीय राज्य मंत्री बिश्वेश्वर टुडू ने उच्च सदन को बताया कि पिछले पांच वर्षों में अनुसूचित जनजाति के 11,925 छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए राष्ट्रीय छात्रवृत्ति मिली जबकि 13,326 छात्रों ने उच्च शिक्षा के लिए राष्ट्रीय फैलोशिप प्राप्त की।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय प्रवासी छात्रवृत्ति योजना का विस्तार 170 छात्रों तक किया गया है।
टुडू ने बताया कि एसटी छात्रों के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति कक्षा 9-10 के उन छात्रों को कवर करती है जिनके अभिभावकों की वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से कम है और इस मद में केंद्र से 75 प्रतिशत योगदान दिया जाता है जबकि राज्य की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत (पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों के लिए क्रमशः 90 प्रतिशत और 10 प्रतिशत) है।
एसटी छात्रों के लिए पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति में कक्षा 11 और उससे ऊपर के छात्र शामिल हैं और जिनके माता-पिता की वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से कम है।
अनुसूचित जनजाति के छात्रों की उच्च शिक्षा के लिए राष्ट्रीय छात्रवृत्ति योजना 6 लाख रुपये से कम वार्षिक अभिभावक आय वाले एसटी छात्रों के लिए विभिन्न व्यावसायिक क्षेत्रों में स्नातक / स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों का समर्थन करती है।
अनुसूचित जनजाति के छात्रों की उच्च शिक्षा के लिए राष्ट्रीय फैलोशिप योजना भारत में एमफिल या पीएचडी करने वाले मेधावी छात्रों की सहायता करती है, जो हर साल 750 फैलोशिप प्रदान करती है।
नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप विदेशों में शीर्ष 1,000 विश्व रैंकिंग विश्वविद्यालयों में मास्टर डिग्री, पीएचडी और पोस्ट-डॉक्टरेट अनुसंधान जैसे पाठ्यक्रमों के लिए सालाना 20 छात्रों को प्रायोजित करती है। यह उन एसटी छात्रों के लिए है, जिनकी वार्षिक पारिवारिक आय 6 लाख रुपये से अधिक नहीं है।
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