ताजा खबरें | सैटेलाइट स्पेक्ट्रम का आवंटन नीलामी से नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था के तहत किया जाएगा: सिंधिया

नयी दिल्ली, तीन अप्रैल संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बृहस्पतिवार को संसद में स्पष्ट किया कि वैश्विक प्रथाओं के अनुरूप, सैटेलाइट स्पेक्ट्रम का आवंटन नीलामी के बजाय प्रशासनिक व्यवस्था के तहत किया जाएगा।

राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान मोबाइल और सैटेलाइट संचार के बीच तकनीकी अंतर को स्पष्ट करते हुए सिंधिया ने कहा, ‘‘हम ऐसी संपत्ति की नीलामी नहीं कर सकते जो पूरी तरह से हमारे नियंत्रण में न हो। यह केवल भारत पर ही नहीं बल्कि पृथ्वी पर सभी देशों पर लागू होता है।’’

उन्होंने स्पष्ट किया कि मोबाइल प्रौद्योगिकी कम आवृत्ति वाली तरंगों पर काम करती है जो वायुमंडल में फैल जाती हैं, जिससे सिग्नल में होने वाले व्यवधान को रोकने के लिए स्पेक्ट्रम की नीलामी की आवश्यकता होती है।

उन्होंने कहा कि इसके विपरीत, सैटेलाइट संचार में स्थिर एंटेना के माध्यम से लेज़र की तरह सीधे प्रेषित उच्च आवृत्तियों का उपयोग किया जाता है।

पूरक प्रश्नों का जवाब देते हुए संचार मंत्री सिंधिया ने कहा ‘‘आज, दुनिया भर में ऐसा कोई देश नहीं है जो सैटेलाइट स्पेक्ट्रम की नीलामी करता हो। अमेरिका का ऑर्बिट कानून सैटेलाइट स्पेक्ट्रम की नीलामी को प्रतिबंधित करता है। यूरोप, फ्रांस, जर्मनी - सभी देश सैटेलाइट स्पेक्ट्रम को प्रशासनिक तरीके से आवंटित करते हैं। भारत केवल वैश्विक मानदंड का पालन कर रहा है।’’

सिंधिया ने कहा कि स्पेक्ट्रम की कीमत भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) द्वारा निर्धारित की जाएगी। उन्होंने कहा, ‘‘एक बार जब ट्राई उस कीमत को परिभाषित कर देगा, तो स्पेक्ट्रम बिना किसी भेदभाव के, सभी प्रदाताओं को आवंटित किया जाएगा।’’

उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ उपग्रह की कक्षा और आवृत्तियों को निर्धारित करता है, जिसमें अलग-अलग देश केवल अपने क्षेत्रों के भीतर उपयोग को नियंत्रित करते हैं।

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