देश की खबरें | संत ने की लिंगायतों के लिए आरक्षण बढ़ाने, अल्पसंख्यक का दर्जा दिए जाने की वकालत
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. कुदालसंगम पंचमसाली पीठ के संत बसवजया मृत्युंजय स्वामी ने कहा कि वह लिंगायत समुदाय के लिए आरक्षण में वृद्धि किए जाने पर जोर देंगे, भले ही 10 मई को होने वाले कर्नाटक विधानसभा चुनाव के बाद कोई भी राजनीतिक दल सत्ता में आए।
बेलगावी (कर्नाटक), सात मई कुदालसंगम पंचमसाली पीठ के संत बसवजया मृत्युंजय स्वामी ने कहा कि वह लिंगायत समुदाय के लिए आरक्षण में वृद्धि किए जाने पर जोर देंगे, भले ही 10 मई को होने वाले कर्नाटक विधानसभा चुनाव के बाद कोई भी राजनीतिक दल सत्ता में आए।
उन्होंने कहा कि सिद्धरमैया के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती सरकार (2013 से 2018) ने केंद्र से जैन और बौद्ध धर्म की तर्ज पर लिंगायत समुदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा देने की सिफारिश की थी, लेकिन केंद्र सरकार ने प्रस्ताव को न तो स्वीकार किया और न ही खारिज किया।
संत ने कहा, ‘‘मुझे उम्मीद है कि लिंगायतों को अलग अल्पसंख्यक दर्जा दिया जाएगा।’’
उन्होंने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में 3बी से 2ए में शक्तिशाली लिंगायत समुदाय के सबसे बड़े उप-संप्रदाय पंचमशालियों के वर्गीकरण की मांग को लेकर 32 महीने तक चले आंदोलन का नेतृत्व किया था। चूंकि 2ए के तहत यह वर्गीकरण करना संभव नहीं था, इसलिए बोम्मई सरकार ने एक नई '2डी' श्रेणी बनाई और दो प्रतिशत अधिक आरक्षण प्रदान किया, जिससे लिंगायतों के लिए कुल आरक्षण सात प्रतिशत हो गया।
राज्य में आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक स्थिति के आधार पर ओबीसी की चार श्रेणियां-2ए, 2बी, 3ए और 3बी हैं। इन समुदायों को श्रेणियों के आधार पर नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण मिलता है। 2ए में सर्वाधिक पिछड़ों के लिए आरक्षण का प्रावधान है, जबकि 2बी मध्यम, और उनसे थोड़ा ऊपर 3ए तथा 3बी हैं।
कर्नाटक में लिंगायतों की आबादी करीब 17 फीसदी है।
पीटीआई- को दिए एक साक्षात्कार में मृत्युंजय स्वामी ने कहा, "वर्तमान स्थिति में, हमें कुछ न्याय मिला है। हम सरकार के फैसले से संतुष्ट हैं। यह हमारे विरोध की पहली जीत है।"
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