देश की खबरें | विवाह की समान आयु: उच्च न्यायालयों में लंबित याचिकाओं के शीर्ष अदालत में स्थानांतरण के लिये याचिका

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एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 22 अक्टूबर लड़के और लड़कियों के विवाह की समान आयु के लिये विभिन्न उच्च न्यायालयों में लंबित जनहित याचिकाओं को शीर्ष अदालत में स्थानांतरित करने के लिये एक याचिका दायर की गयी है, ताकि इस विषय पर परस्पर विरोधी दृष्टिकोण को टाला जा सके।

भाजपा नेता और अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने दिल्ली और राजस्थान उच्च न्यायालय में इसी विषय को लेकर लंबित याचिकायें शीर्ष अदालत में स्थानांतरित करने के अनुरोध के साथ याचिका दायर की है।

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याचिका में कहा गया है कि इसका मकसद ‘‘लैंगिक न्याय, लैंगिक समानता और महिलाओं की गरिमा’’ सुरक्षित रखना है। इस समय देश में लड़कियों की विवाह की आयु 18 साल और लड़के की 21 साल है।

लड़के और लड़की की विवाह की समान आयु करने के मुद्दे पर उपाध्याय की याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने पिछले साल अगस्त में केन्द्र और विधि आयोग को नोटिस जारी किये थे।

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इसके बाद, इस साल पांच फरवरी को राजस्थान उच्च न्यायालय ने अब्दुल मन्नान की इसी तरह की जनहित याचिका पर केन्द्र और अन्य से जवाब मांगा था।

अधिवक्ता अश्विनी कुमार दुबे के माध्यम से दायर स्थानांतरण याचिका में उपाध्याय ने न्यायालय से अनुरोध किया है कि इस महत्वपूर्ण विषय पर अलग अलग स्थान पर मुकदमे की सुनवाई और इस पर उच्च न्यायालयों के परस्पर विरोधी दृष्टिकोण की संभावना टालने के इरादे से शीर्ष अदालत को सुविचारित व्यवस्था देनी चाहिए।

स्थानांतरण याचिका के अनुसार महिला और पुरुष की विवाह की आयु में अंतर का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है और यह पूरी तरह से वैश्विक प्रचलन के खिलाफ है। याचिका में कहा गया है कि इस समय दुनिया के 125 देशों में लड़कों और लड़कियों की विवाह की आयु समान है।

याचिका में अगस्त 2018 में नयी दिल्ली में आयोजित बाल विवाह विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की सिफारिश जिक्र किया गया है, जिसमें कहा गया था कि भारत को इसका अनुसरण करना चाहिए।

याचिका में कहा गया है कि भारत में विभिन्न समुदाय के अपने-अपने विवाह कानून हैं। इनमें भारतीय ईसाई विवाह कानून, पारसी विवाह और विवाह विच्छेद कानून, विशेष विवाह कानून, हिन्दू विवाह कानून और बाल विवाह निषेध कानून हैं और ये सभी पक्षपात पूर्ण प्रतिबंध के लिये जिम्मेदार हैं।

भारतीय ईसाई विवाह कानून, 1872 के तहत विवाह करने के इच्छुक व्यक्ति की उम्र 21 साल और महिला की उम्र 18 साल से कम नहीं होनी चाहिए। इसी तरह पारसी विवाह एवं विवाह विच्छेद कानून, 1936 के तहत लड़के की आयु 21 और लड़की 18 साल की उम्र पूरी कर चुकी होनी चाहिए।

याचिका के अनुसार दूसरे कानूनों में भी लड़के और लड़की की विवाह की आयु को लेकर विसंगतियां व्याप्त हैं। ऐसी स्थिति में विवाह की आयु में एकरूपता लाने के लिये एक सुविचारित व्यवस्था जरूरी है और इसके लिये शीर्ष अदालत को उच्च न्यायालयों में लंबित मामले अपने यहां मंगा लेने चाहिए।

अनूप

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