जरुरी जानकारी | रुपया 62 पैसे की भारी गिरावट के साथ 79.15 प्रति डॉलर पर
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. भारत के बढ़ते व्यापार घाटे तथा अमेरिका-चीन तनाव बढ़ने के कारण निवेशकों की कारोबारी धारणा प्रभावित होने से चालू वित्त वर्ष में रुपये में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 62 पैसे लुढ़ककर 79.15 रुपये पर बंद हुआ।
मुंबई, तीन अगस्त भारत के बढ़ते व्यापार घाटे तथा अमेरिका-चीन तनाव बढ़ने के कारण निवेशकों की कारोबारी धारणा प्रभावित होने से चालू वित्त वर्ष में रुपये में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 62 पैसे लुढ़ककर 79.15 रुपये पर बंद हुआ।
विदेशी कोषों का निवेश बढ़ने तथा कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से घटने से रुपये को कुछ समर्थन मिला। फेडरल रिजर्व के अधिकारियों की तीखी आक्रामक रुख वाली टिप्पणियों के बाद नए सिरे से ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका ने रुपये को 79 के स्तर से नीचे धकेल दिया।
मंगलवार को रुपया 53 पैसे की तेजी के साथ 11 महीने में एक दिन की सबसे अच्छी बढ़त के साथ अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एक महीने के उच्चतम स्तर 78.53 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया कमजोरी के साथ 78.70 के स्तर पर खुला। रुपये में आगे और गिरावट आई और यह दिन के निचले स्तर 79.21 रुपये प्रति डॉलर तक चला गया। अंत में रुपया 62 पैसे की हानि दर्शाता 79.15 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ जो सात मार्च के बाद की एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट है।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के शोध विश्लेषक, दिलीप परमार के अनुसार, ऊंचे व्यापार घाटे का आंकड़ा और डॉलर की भारी मांग के बीच रुपया कमजोर रहा क्योंकि व्यापारियों में अमेरिका-चीन तनाव से जुड़े जोखिमों के कारण डॉलर की मांग बढ़ गई।
बीएनपी पारिबा बाय शेयरखान में शोध विश्लेषक, अनुज चौधरी ने कहा, ‘‘भारत के निराशाजनक वृहत आर्थिक आंकड़ों के सामने आने से रुपये पर दबाव बढ़ गया। जुलाई में भारत का सेवा पीएमआई घटकर 55.5 रह गया, जो जून में 59.2 था, जबकि इसी अवधि के दौरान समग्र पीएमआई 58.2 से घटकर 56.6 रह गया।
उन्होंने कहा, ‘‘भारत का व्यापार घाटा जून के 26.18 अरब डॉलर की तुलना में जुलाई में बढ़कर 31.02 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।’’
हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और विदेशी कोषों का निवेश बढ़ने के कारण रुपये की गिरावट पर कुछ अंकुश लगा। विदेशी संस्थागत निवेशक मंगलवार को पूंजी बाजार में शुद्ध लिवाल बने रहे। एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार उन्होंने 825.18 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।
अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.95 प्रतिशत गिरकर 99.58 डॉलर प्रति बैरल रह गया।
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(The above story first appeared on LatestLY on Aug 03, 2022 10:01 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

