देश की खबरें | अफवाह, फर्जी खबरें मणिपुर में हिंसा को बढ़ावा देने वाला बड़ा खतरा : अधिकारी

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(सुमीर कौल)

इंफाल, 23 जुलाई मणिपुर में तीन मई से भड़की जातीय हिंसा में अब तक 160 से अधिक लोगों की मौत हुई है। राज्य में हालात पर नजर रखने वाली विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों का कहना है कि हिंसा को बड़े पैमाने पर अफवाहों और फर्जी खबरों के कारण बढ़ावा मिला।

कांगपोकपी जिले में दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाने से संबंधित चार मई की घृणित घटना उन यौन हमलों में से एक थी जो पॉलीथिन में लिपटे एक शव की तस्वीर के सोशल मीडिया पर आने और इसके साथ यह झूठा दावा किए जाने के बाद हुए कि पीड़िता की चुराचांदपुर में आदिवासियों द्वारा हत्या कर दी गई।

इस संबंध में एक अधिकारी ने कहा कि बाद में पता चला कि तस्वीर राष्ट्रीय राजधानी में हत्या की शिकार एक महिला की है, लेकिन उस समय तक घाटी में हिंसा भड़क चुकी थी और अगले दिन जो देखा गया, उसने मानवता को शर्मसार कर दिया। कांगपोकपी की घटना का वीडियो पिछले हफ्ते सोशल मीडिया पर सामने आया था और इससे देश में बड़े पैमाने पर आक्रोश फैल गया।

उसी दिन, बमुश्किल 30 किमी दूर 20 साल की दो और महिलाओं से बलात्कार किया गया तथा उनकी हत्या कर दी गई। अधिकारियों ने कहा कि फर्जी तस्वीर के कारण हिंसा की आग भड़कने लगी और राज्य सरकार द्वारा तीन मई को इंटरनेट बंद किए जाने का एक कारण यह घटना भी थी।

विभिन्न दलों और कार्यकर्ताओं के एक वर्ग ने इंटरनेट पर रोक का विरोध किया है। मामले में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए उच्चतम न्यायालय ने 17 जुलाई को मणिपुर सरकार से कहा कि वह राज्य में इंटरनेट की सीमित बहाली पर उच्च न्यायालय के पूर्व के आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय के समक्ष ही अपनी शिकायत उठाए।

मणिपुर में तीन मई से हिंसा की भड़की आग को शांत करने में लगी विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के विश्लेषण से यह निष्कर्ष निकला है कि ‘‘स्थानीय समाचार पत्रों द्वारा प्रसारित की जा रही फर्जी या एकतरफा खबरों पर भी कोई नियंत्रण नहीं है।’’

उन्होंने एक हालिया उदाहरण का हवाला देते हुए कहा कि एक अग्रणी अखबार ने दावा किया था कि हथियारों से लैस आदिवासी लोग चंदेल जिले के क्वाथा गांव में बहुसंख्यक समुदाय के सदस्यों पर हमला करने की साजिश रच रहे हैं। अखबार की खबर पर मणिपुर पुलिस हरकत में आई, लेकिन पता चला कि खबर झूठी थी।

पुलिस ने एक बयान जारी कर कहा कि किसी भी गांव को जलाने का कोई प्रयास नहीं किया गया जैसा कि कुछ स्थानीय अखबारों ने बताया। पुलिस ने फिर से अपील की कि संवेदनशील मामलों में केवल सत्यापित जानकारी ही प्रकाशित की जानी चाहिए।

पुलिस ने सोशल मीडिया या किसी भी जानकारी की पुष्टि करने और दुष्प्रचार के प्रसार को रोकने के लिए एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया।

कुछ दिन पहले चुराचांदपुर में आदिवासी युवाओं को मार्च करते हुए दिखाने वाला एक और वीडियो घाटी में प्रसारित हुआ, जिसमें दावा किया गया था कि आदिवासी बहुसंख्यक समुदाय से महिलाओं और बच्चों को छीन लेंगे। चूंकि वीडियो मिजो में था, जो कि कुकी-चिन क्षेत्रों में सबसे अधिक बोली जाने वाली है, कुछ असामाजिक तत्वों ने फायदा उठाया और इंफाल घाटी में गुस्सा बढ़ाने के लिए इसमें उपशीर्षक डाल दिए, जहां आम तौर पर मणिपुरी मेइतिलोन बोली जाती है।

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