देश की खबरें | ‘आदित्य-एल1’ मिशन को साकार करने में इसरो के पूर्व अध्यक्ष यू आर राव की भूमिका को याद किया गया

बेंगलुरु, दो सितंबर भारत के महत्वाकांक्षी सूर्य मिशन ‘आदित्य एल1’ के सफल प्रक्षेपण के साथ ही इसरो के पूर्व प्रमुख यू. आर. राव के सपने और प्रारंभिक चरण में इसे साकार करने में उनके योगदान को याद किया गया।

इसरो के अनुसार, प्यार से भारत के उपग्रह कार्यक्रम के जनक कहे जाने वाले प्रोफेसर राव विशेष रूप से आदित्य मिशन को लेकर उत्साहित थे। उन्होंने अभियान को और अधिक सार्थक एवं समकालीन बनाने के लिए इसके कक्षीय मापदंडों सहित मिशन के उद्देश्यों में पूरी तरह से सुधार सुनिश्चित किया।

राव के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए इसरो की वेबसाइट पर कहा गया-प्रो. राव का धन्यवाद, आदित्य-एल1 लैग्रेंज बिंदु ‘एल1’ में स्थापित होने वाला भारत का पहला मिशन होगा, जो पृथ्वी से 15 लाख किलोमीटर की दूरी पर स्थित कक्षीय विन्यास में मुक्ति बिंदुओं में से एक है।

इसरो ने शनिवार को पीएसएलवी-सी57 प्रक्षेपण यान के जरिए ‘आदित्य-एल1’ का सफल प्रक्षेपण किया।

यान ने अब उपग्रह को इच्छित कक्षा में पहुंचा दिया है, जहां से वह 125 दिन की यात्रा पर सूर्य-पृथ्वी एल1 बिंदु के अपने गंतव्य की ओर आगे बढ़ेगा।

अंतरिक्ष यान को अंततः सूर्य-पृथ्वी प्रणाली के लैग्रेंज बिंदु-1 (एल1) के चारों ओर एक प्रभामंडल कक्षा में स्थापित किया जाएगा। एल1 बिंदु के चारों ओर प्रभामंडल कक्षा में रखे जाने पर उपग्रह को सूर्य को बिना किसी रुकावट या ग्रहण के लगातार देखने का प्रमुख लाभ होता है। इससे वास्तविक समय में सौर गतिविधियों और अंतरिक्ष मौसम पर इसके प्रभाव को देखने का अधिक लाभ मिलता है।

सफल प्रक्षेपण के बाद ‘आदित्य-एल1’ की परियोजना निदेशक निगार शाजी ने यू आर राव का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने टिप्पणी की, "इस समय, मैं प्रो. यू आर राव को याद करना चाहूंगी, जिन्होंने इस मिशन के लिए बीज बोया था।"

‘आदित्य एल1’ के प्राथमिक उपकरण ‘विजिबल एमिशन लाइन कोरोनाग्राफ’ (वीईएलसी) का निर्माण करने वाले भारतीय ताराभौतिकी संस्थान (आईआईए) के प्रोफेसर जगदेव सिंह ने मिशन के लिए गंतव्य के रूप में ‘एल1’ को निर्धारित करने में राव द्वारा निभाई गई भूमिका को याद किया।

उन्होंने कहा, "इसरो ने सबसे पहले हमें (आईआईए) 50 सेमी का एक छोटा मंच प्रदान किया... बाद में, जब हम उपकरण बनाने के आधे रास्ते पर थे, उस समय यह विचार आया कि क्या हम साल में पूरे 365 दिन और 24 घंटे सूर्य का अध्ययन करना चाहते हैं, जब हम पृथ्वी की निचली कक्षा में जाते हैं और उपग्रह को ध्रुवीय कक्षा में स्थापित करते हैं, तब सूर्य पर ग्रहण लगने पर कुछ स्थितियां होंगी और हम पृथ्वी की निचली कक्षा में सूर्य का निरीक्षण नहीं कर पाएंगे। तो फिर इसरो, विशेष रूप से प्रो. यू आर राव ने सुझाव दिया कि पृथ्वी की निचली कक्षा के बजाय हम एल1 पर जा सकते हैं।''

सिंह ने कहा कि अंतरिक्ष यान को ‘एल1’ में स्थापित करने की योजना के साथ, वीईएलसी के साथ अन्य छह उपकरण जोड़े गए और उपग्रह बहुत बड़ा हो गया तथा मिशन भी बड़ा हो गया।

ऐसे कई वैज्ञानिक मुद्दे थे जो प्रो. राव का ध्यान आकर्षित कर रहे थे जैसे सूर्य के वर्णमंडल, परिवर्ती क्षेत्र, परिमंडल और इसकी तपन से संबंधित समस्या का अध्ययन।

इसरो ने कहा, "यह काफी दुर्भाग्यपूर्ण है कि वह अपने प्रिय मिशन को साकार होता देखने के लिए जीवित नहीं रह सके।"

राव 1984-1994 के बीच इसरो के अध्यक्ष थे। वर्ष 2017 में 85 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया था। उन्हें उसी वर्ष पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था।

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