जरुरी जानकारी | ब्याज दरें बढ़ने और महंगाई से किफायती आवास वित्त कंपनियों पर पड़ेगा असर: रिपोर्ट

मुंबई, 14 जुलाई बैंकों की तरफ से ब्याज दरें बढ़ाने और उच्च मुद्रास्फीति के साथ निर्माण लागत बढ़ने से चालू वित्त वर्ष में किफायती आवास वित्त कंपनियों की तेजी पर विराम लग सकता है।

इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने बृहस्पतिवार को जारी अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि किफायती आवास वित्त कंपनियों के लिए 25 लाख रुपये से कम आकार वाले आवास ऋण सबसे मजबूत क्षेत्रों में से एक साबित हुआ है और पिछले एक दशक के दौरान इस क्षेत्र में तीव्र प्रगति दर्ज की गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 25 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर के साथ किफायती आवास क्षेत्र ने पिछले पांच वर्षों में समग्र आवास वित्त क्षेत्र की वृद्धि को भी पीछे छोड़ दिया है।

रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्र को समर्थन देने वाली कुछ अनुकूल परिस्थितियां अब नरम हो गई हैं जो इस क्षेत्र में ऋण वृद्धि की रफ्तार को धीमा कर सकती है।

रेटिंग एजेंसी ने कहा, ‘‘ब्याज दरों में वृद्धि, उच्च मुद्रास्फीति के कारण नकदी में कमी और निर्माण लागत में वृद्धि से नयी आवासीय परियोजनाओं को शुरू करने में देरी के साथ संपत्ति की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो रही है। सरकार की ऋण से जुड़ी सब्सिडी योजना (सीएलएसएस) को रोकना इस खंड के सामने आने वाली कुछ चुनातियों में से एक है।’’

इंडिया रेटिंग्स ने कहा कि ब्याज दरों में एक प्रतिशत की वृद्धि होने पर कर्ज लेने वालों की मासिक किस्त सालाना आधार पर 6.1-6.4 प्रतिशत तक बढ़ जाएगी। वहीं, किफायती आवास के मामले में यह बढ़ोतरी करीब 5.3 प्रतिशत होगी।

इसी तरह कर्ज की ब्याज दर में अगर दो प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है तो मासिक किस्त में 10.8 प्रतिशत से लेकर 13 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो जाएगी।

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