देश की खबरें | आरजी कर भ्रष्टाचार मामले में आरोप तय करने से पहले आरोपी को उचित समय दिया जाना चाहिए : अदालत

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कोलकाता, छह फरवरी कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि आर जी कर चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के पूर्व प्राचार्य संदीप घोष के खिलाफ उनके कार्यकाल के दौरान हुई वित्तीय अनियमितताओं के मामले में आरोप तय करने से पहले उन्हें उचित समय दिया जाना चाहिए।

घोष उस समय आरजी कर चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के प्राचार्य थे, जब पिछले वर्ष नौ अगस्त को एक संगोष्ठी कक्ष में एक चिकित्सक के साथ बलात्कार कर उसकी हत्या कर दी गई थी, जिससे पूरे देश में आक्रोश फैल गया था।

मामले में आरोप तय करने संबंधी प्रक्रिया को स्थगित करने की घोष की अपील पर विचार करते हुए अदालत ने कहा कि मुकदमे की सुनवाई हालांकि तेजी से होनी चाहिए लेकिन कानून की उचित प्रक्रिया का भी पालन किया जाना चाहिए।

घोष ने एकल पीठ के आदेश को चुनौती देते हुए खंडपीठ के समक्ष अपील दायर की थी, जिसमें वित्तीय अनियमितताओं के मामले में आरोप तय करने की प्रक्रिया स्थगित करने से इनकार कर दिया गया था।

घोष ने अलीपुर स्थित विशेष सीबीआई अदालत को इस मामले में उनके खिलाफ आरोप तय करने की प्रक्रिया स्थगित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया।

इस मामले के सिलसिले में केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने घोष को गिरफ्तार किया था और फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में हैं।

खंडपीठ ने इस बात पर जोर दिया कि प्रत्येक आरोपी को कानून की उचित प्रक्रिया से गुजरने का अधिकार है।

घोष के वकील ने खंडपीठ के समक्ष कहा कि सीबीआई ने एक फरवरी को हजारों पृष्ठों के दस्तावेज उसे सौंपे थे और मामले में आरोप तय करने की तारीख विशेष अदालत के समक्ष चार फरवरी को निर्धारित की गई थी, जिससे मामले से संबंधित बड़ी संख्या में दस्तावेजों का अध्ययन करने के लिए केवल चार दिन का समय मिला।

यह पूछे जाने पर कि क्या दस्तावेजों का अध्ययन करने के लिए समय मांगना अनुचित है, न्यायमूर्ति बागची ने हालांकि घोष के वकील से स्पष्ट रूप से कहा कि उनके पास निचली अदालत के समक्ष सुनवाई को लम्बा खींचने का विशेषाधिकार नहीं है।

खंडपीठ में शुभेंदु सामंत भी शामिल थे।

खंडपीठ ने प्रस्ताव दिया कि यदि आरोपी चाहे तो उसे ‘डिस्चार्ज’ याचिका दायर करने के लिए दस्तावेजों का अध्ययन करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया जा सकता है।

‘डिस्चार्ज’ याचिका एक आपराधिक मामले में अभियुक्त द्वारा किया गया एक कानूनी अनुरोध है, जिसमें उसके खिलाफ लगे आरोपों से मुक्त किये जाने का अनुरोध किया जाता है।

पीठ ने कहा कि वह अलीपुर स्थित विशेष सीबीआई अदालत के समक्ष सुनवाई की निगरानी करेगी, ताकि आरोपों से मुक्त किये जाने के अनुरोध संबंधी याचिकाओं पर सुनवाई उसके समक्ष आने के सात दिनों के भीतर हो सके।

पीठ ने कहा कि ‘डिस्चार्ज’ याचिका खारिज होने की स्थिति में विशेष अदालत के समक्ष आरोप तय किए जाएंगे।

खंडपीठ ने कहा कि वह मामले को सुनवाई के लिए तीन सप्ताह के लिए स्थगित करेगी और सीबीआई उस तिथि पर वस्तु स्थिति पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

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