जरुरी जानकारी | ‘ तीसरी, चौथी तिमाही में पुनरूद्धार गिरावट के बाद तीव्र वृद्धि के रूप में होगा’

नयी दिल्ली, 27 जुलाई पंद्रहवे वित्त आयोग के चेयरमैन एन के सिंह ने सोमवार को कहा कि चालू वित्त वर्ष की तीसरी और चौथी तिमाही में आर्थिक वृद्धि में तेजी से सुधार होगा। उन्होंने उस दौरान की संभावित वृद्धि के ग्राफ की तुलना अंग्रेजी के वी आकार से की जो गिरावट के बाद तीव्रता से ऊपर उठने की स्थिति दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि लेकिन इसके बावजूद 2020-21 में जीडीपी वृद्धि दर में गिरावट ही आएगी और यह नकारात्मक दायरे में रहेगी क्योंकि कोरोना वायरस की रोकथाम के लिये लगाये गये ‘लॉकडाउन’ से मांग और आपूर्ति की स्थिति गंभीर रूप से बिगड़ी है।

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सिंह ने कहा कि वैश्विक आार्थिक मंदी का असर अगले वित्त वर्ष पर भी पड़ेगा। उन्होंने कहा कि 2022-23 में आर्थिक गतिविधियों में विस्तार इस बात को निर्धारित करेगा कि आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिये जो कदम उठाये गये थे, वे सतत थे या नहीं।

सिंह ने एआईएमए के एक कार्यक्रम में कहा, ‘‘इस महामारी का ‘लॉकडाउन’ के कारण गंभीर आर्थिक प्रभाव पड़ा है। इससे मांग और आपूर्ति के मोर्चे पर स्थिति बुरी तरह बिगड़ी है।’’

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उन्होंने कहा, ‘‘यह तय है कि पहली और दूसरी तिमाही का प्रदर्शन कम-से-कम अच्छा नहीं रहेगा। मेरे हिसाब से चालू वित्त वर्ष की तीसरी और चौथी तिमाही में वृद्धि वी’ के आकार में होगी। कोई जरूरी नहीं है कि कोई चीज बुनियादी रूप से होगी या हो सकती है बल्कि तुलनात्मक आधार कमजोर होने से यह होगा। इसके बावजूद पूरे वित्त वर्ष में वृद्धि दर नकारात्मक दायरे में ही रहेगी।’’

भारत की आर्थिक वृद्धि दर 2019-20 में 4.2 प्रतिशत थी। चालू वित्त वर्ष में विभिन्न वैश्विक और घरेलू एजेंसियों ने वृद्धि दर में (-) 3.2 से (-) 9.5 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान जताया है।

जहां विश्व बैंक ने आर्थिक वृद्धि दर (-) 3.5 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है वहीं अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) और एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने 4.5 प्रतिशत और 4 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान जताया है। रेटिंग एजेंसी एस एंड पी ने आर्थिक वृद्धि दर में 5 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान जताया है।

हाल ही में घरेलू रेटिंग एजेंसी इक्रा ने चालू वित्त वर्ष में देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 9.5 प्रतिशत की गिरावट क अनुमान जताया है जबकि पूर्व में उसने 5 प्रतिशत की गिरावट की बात कही थी।

सिंह ने आगे कहा कि भारत जैसे देश के लिये जीडीपी के अनुपात के रूप में कर्ज 60 प्रतिशत रहना चाहिए और मध्यम अवधि में उस स्तर पर पहुंचने के लिये राजकोषीय घाटे को कर्ज लक्ष्य से संबद्ध करना होगा।

देश का कर्ज-जीडीपी अनुपात 2019-20 में 70 प्रतिशत रहा और चालू वित्त वर्ष में सके 80 प्रतिशत पहुंच जाने का अनुमान है।

बैंकों में पूंजी डाले जाने के संदर्भ में उन्होंने कहा कि अगले पांच साल में सार्वजनिक व्यय काफी होगा और इसके लिये जरूरी है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में पर्याप्त पूंजी हो।

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