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एक महीने के भीतर लागू हो सकती है संशोधित शुल्क नीति: आर के सिंह

नीति में बिजली की बेवजह कटौती के लिये वितरण कंपनियों पर जुर्माना लगाने जैसे प्रावधान किये गये हैं।

एक महीने के भीतर लागू हो सकती है संशोधित शुल्क नीति: आर के सिंह
जमात

नयी दिल्ली, 15 मई बिजली मंत्री आर के सिंह ने शुक्रवार को कहा कि संशोधित शुल्क नीति को मंत्रियों के समूह ने मंजूरी दे दी है और उसे एक महीने के भीतर क्रियान्वित किया जा सकता है।

नीति में बिजली की बेवजह कटौती के लिये वितरण कंपनियों पर जुर्माना लगाने जैसे प्रावधान किये गये हैं।

सिंह ने कहा, ‘‘प्रशुल्क नीति केंद्रीय मंत्रिमंडल को भेजी गई थी और उसके बाद उसे मंत्रियों के अनौपचारिक समूह को भेजा गया। मंत्री समूह ने उसे मंजूरी दे दी है। इसीलिए अब हम उसे मंत्रिमंडल की अगली बैठक में रखने का हमारा प्रस्ताव है...उम्मीद एक यह एक महीने के भीतर हो जाना चाहिए।’’

उन्होंने उद्योग मंडल सीआईआई के एक कार्यक्रम में बिजली और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों के मुख्य कार्यपालक अधिकारियों (सीईओ) के साथ वीडियो कांफ्रेन्सिंग के जरिये बातचीत में यह बात कही।

संशोधित शुल्क नीति में तकनीकी गड़बडी या प्राकृतिक आपदा को छोड़कर बिजली कटौती होने पर जुर्माने का प्रावधान है।

सरकार ने सस्ती दरों पर सभी को 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा है। इसकी व्यवस्था नई शुल्क नीति में है। नीति में पारेषण और वितरण नुकसान को एक दायरे में रखने का प्रावधान किया गया है। एक बार प्रशुल्क नीति को मंजूरी मिलने के बाद वितरण कंपनियों को पारेषण और वितरण नुकसान 15 प्रतिशत से अधिक होने पर उसका भार ग्राहकों पर डालने की अनुमति नहीं होगी।

नीति में समय के हिसाब से शुल्क व्यवस्था (टाइम ऑफ द डे टैरिफ) का भी प्रावधान किया गया है। यानी व्यस्त समय में अधिक दर से बिजली शुल्क लेने का प्रावधान किया गया है। इससे ग्राहक कम व्यस्त समय में बिजली खपत बढ़ाकर बिल में कमी ला सकेंगे।

‘लॉकडाउन’ के कारण वित्तीय दबाव से जूझ रही वितरण कंपनियों को हाल में मिली राहत का जिक्र करते हुए सिंह ने कहा, ‘‘हमने बिजली उत्पादन से जुड़े अपने केंद्रीय लोक उपक्रमों को वितरण कंपनियों से लिये जाने वाले ‘फिक्स्ड चार्ज’ आगे के लिये टालने को कहा है। अर्थव्यवस्था के सुचारू होने के बाद यह शुल्क वितरण कंपनियां समान किस्तों में बिना ब्याज के भुगतान करेंगी। इससे वितरण कंपनियों को राहत मिलेगी।’

उन्होंने कहा, ‘’ हमने सार्वजनिक क्षेत्र के अपने बिजली उत्पादकों से बिजली लागत में 20 से 25 प्रतिशत छूट देने को कहा है। हम चाहते हैं कि वितरण कंपनियां इसका लाभ ग्राहकों को दें। ‘लॉकडाउन’ समाप्त होने के बाद जब अर्थव्यवस्था फिर से खुलेगी यह ग्राहकों के पहले बिल में दिखाई देगा।’’

सिंह ने यह उद्योग प्रतिनिधियों से यह भी कहा कि बिजली मंत्रालय थोक ग्राहकों के लिये सीधे उत्पादकों से बिजली खरीद (ओपेन एक्सेस) को आसान बना रहा है। नई प्रशुल्क नीति के तहत इस प्रकार के आवेदन को 30 दिन के भीतर निपटाया जाएगा।

उन्होंने सौर और पवन ऊर्जा उपकरण के विनिर्माण को प्रोत्साहन देने के लिये सीमा शुल्क बाधा हटाने की भी बात कही।

उद्योग प्रतिनिधियों ने बिजली को माल एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था के दायरे में लाने पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाएं लगाने के लिये परोक्ष रूप से सब्सिडी दिये जाने को कहा।

उद्योग प्रतिनिधियों ने कोरोना वायरस ‘लॉकडाउन’ के कारण परियोजना विकास के लिये समयसीमा बढ़ाने पर भी जोर दिया।

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(The above story first appeared on LatestLY on May 15, 2020 10:26 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).