बारीपदा (ओडिशा), 28 मई ओडिशा के मयूरभंज जिले में बृहस्पतिवार को अपने घर में पृथक-वास में रह रहे एक प्रवासी श्रमिक की मौत हो गई। वह हाल ही में सूरत से लौटा था।
पुलिस ने यह जानकारी दी।
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प्रवासी श्रमिक की पहचान भालुबासा गांव के 54 वर्षीय शरत चंद्र मोहंता के रूप में की गई। मोहंता 10 दिन पहले सूरत से ओडिशा लौट कर आया था जिसके बाद उसे सात दिनों तक संस्थागत पृथक-वास के तहत बेटनोती आदर्श विद्यालय में रखा गया। तीन दिन पहले उसे संस्थागत पृथक-वास से छुट्टी देकर घर में एकांत-वास में रहने को कहा गया था।
महंत के परिजनों ने बताया, “उसमें कोरोना वायरस के कोई लक्षण नहीं दिख रहे थे।आज सुबह अचानक उसे बेचैनी होने लगी और वह घर से बाहर आ गया जिसके कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई।”
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मृतक का बेटा सूरत में एक कंपनी में काम करता है।
परिवालों वालों ने दावा किया कि सात दिन पृथक-वास केंद्र पर रहने के बाद भी प्रशासन की तरफ से किसी ने भी जांच के लिए उसके नमूने एकत्र नहीं किए।
नहंदसोल पंचायत की प्रमुख और केंद्र की प्रभारी सुमित्रा माझी ने भी इस बात की पुष्टि की।
बेटनोती पुलिस थाने के प्रभारी अशोक कुमार नायक ने कहा कि अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज कर लिया गया है और मोहंता के शव को पोस्टमार्टम के लिए बारीपदा के पीआरएम मेडिकल कालेज और अस्पताल भेज दिया गया है।
नायक ने कहा कि गांव वाले मोहंता की अंत्येष्टि में जाने को लेकर अनिच्छुक हैं।
उन्होंने कहा, “बारीपाड़ा की मेडिकल टीम द्वारा लार के नमूने एकत्र करने के बाद कोविड-19 दिशानिर्देशों के अनुसार शव का अंतिम संस्कार किया जाएगा।”
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