जरुरी जानकारी | खुदरा मुद्रास्फीति अगस्त में मामूली घटकर 6.69 प्रतिशत; थोक महंगाई दर पांच महीने के उच्च स्तर पर
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. कुछ खाद्य पदार्थों की महंगाई दर कम होने से खुदरा मुद्रास्फीति अगस्त महीने में मामूली घटकर 6.69 प्रतिशत रही।
नयी दिल्ली, 14 सितंबर कुछ खाद्य पदार्थों की महंगाई दर कम होने से खुदरा मुद्रास्फीति अगस्त महीने में मामूली घटकर 6.69 प्रतिशत रही।
हालांकि आधिकारिक आंकड़े के अनुसार विनिर्मित उत्पाद महंगे होने से अगस्त में थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति बढ़कर पांच महीने के उच्च स्तर 0.16 प्रतिशत पर पहुंच गई। इससे पहले यह कई सप्ताह शून्य से नीचे रही।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के आंकड़े के अनुसार जुलाई महीने की खुदरा मुद्रास्फीति के आंकड़े को संशोधित कर 6.73 प्रतिशत कर दिया गया है जबकि पहले इसके 6.93 प्रतिशत रहने की बात कही गयी थी।
खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति अगस्त महीने में मामूली घटकर 9.05 प्रतिशत रही जबकि जुलाई में यह 9.27 प्रतिशत थी। जुलाई के खाद्य महंगाई दर आंकड़े को भी संशोधित किया गया है। पूर्व में इसके 9.62 रहने का अनुमान जताया गया था।
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खंडवार देखा जाए तो अनाज और उनके उत्पादों के मामले में महंगाई दर आलोच्य महीने में कम होकर 5.92 प्रतिशत रही जबकि जुलाई में यह 6.96 प्रतिशत थी।
मांस और मछली, दूध और उसके उत्पाद तथा दलहन की श्रेणी में मुद्रास्फीति क्रमश: कम होकर 16.50 प्रतिशत, 6.15 प्रतिशत और 14.44 प्रतिशत रही।
हालांकि अंडा, फल और सब्जियों की महंगाई दर तेजी से बढ़ी और यह क्रमश: 10.11 प्रतिशत, एक प्रतिशत और 11.41 प्रतिशत रही।
ईंधन और प्रकाश श्रेणी में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 3.10 प्रतिशत रही जो एक महीने पहले जुलाई में 2.80 प्रतिशत थी।
इक्रा की प्रधान अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, ‘‘उपभोक्ता मूल्य सूचंकाक आधारित महंगाई दर अगस्त 2020 में 6.7 प्रतिशत रही जो उम्मीद से ज्यादा है...खाद् वस्तुओं और आवास खंड में महंगाई दर में जो कमी आयी, उसका भरपाई पान, तंबाकू, ईंधन और विविध वस्तुओं के दाम में वृद्धि ने कर दी।’’
उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर ‘लॉकडाउन के करण आपूर्ति लगातार बाधित होने और कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश से खाद्य और पेय पदार्थों की मुद्रास्फीति में खास कमी नहीं आयी और उच्च स्तर पर बनी हुई है।
नायर ने कहा, ‘‘...अगले महीने सितंबर में इसमें कोई बड़ी कमी की उम्मीद नहीं है। ऐसे में आगामी मौद्रिक नीति समीखा में रेपो दर में कटौती की संभावना कम जान पड़ती है।’’
निवेश परामर्श कंपनी मिलवुड केने इंटरनेशनल के संस्थापक एवं सीईओ निशांत भट्ट ने कहा कि खुदरा मुद्रास्फीति में नरमी से उत्साह बढ़ा है लेकिन अभी यह रिजर्व बैंक को दिए गए अधिकतम छह प्रतिशत तक सीमित रखने के लक्ष्य से ऊपर है। इससे अक्टूबर में ब्याज दर के मोर्चे पर और नरमी लाने की आरबीआइ्र की क्षमता प्रभावित होगी।
एमकी ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख राहुल गुप्ता ने भी कहा कि इस गिरावट के बावजूद इस स्तर की खुदरा मुद्रास्फीति से अक्टूबर में नीतिगत ब्याज दर में कमी किए जाने की उम्मीद कम है।
लेकिन आवासर बाजार की परामर्श सेवा कंपनी नाइट फ्रैंक इंडिया की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा ने कहा कि आपूर्ति की बाधाओं के कारण खुदरा मुद्रास्फीति ऊंची है। इसका दाबाव कम होने पर रिजर्व बैंक दर में कमी कर सकता हैं
रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति की समीक्षा करते समय मुख्य रूप से खुदरा मुद्रास्फीति पर गौर करता है।
सरकार ने केंद्रीय बैंक को खुदरा मुद्रास्फीति दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ 4 प्रतिशत पर रखने का जिम्मा सौंपा है।
डेलॉयट इंडिया की अर्थशास्त्री रूमकी मजूमदार ने कहा कि पिछले कुछ महीनों से आपूर्ति बाधित होने से मुद्रास्फीति ऊंची बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि हालांकि ‘लॉकडाउन’ में निरंतर ढील के साथ आपूर्ति व्यवस्था धीरे-धीरे सुधर रही है। यह अगस्त में उपभोक्ता मूल्य में नरमी के रूप में प्रतिबिंबित होता है।’’
मजूमदार ने कहा, ‘‘आने वाले समय में, हमारा मानना है कि कीमतें यथावत रहेंगी या फिर हल्की कमी आएगी। इसका कारण त्योहारों के दौरान मांग बढ़ सकती है लेकिन इतना नहीं बढ़ेगी जिससे मुद्रास्फीति को लेकर चिंता हो।’’
इधर, विनिर्मित उत्पाद महंगे होने से अगस्त में थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति बढ़कर पांच महीने के उच्च स्तर 0.16 प्रतिशत पर पहुंच गई। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से सोमवार को जारी बयान में यह जानकारी दी गई।
इससे पहले पिछले कई महीनों तक थोक मुद्रास्फीति नकारात्मक दायरे यानी शून्य से नीचे रही थी।
आंकड़ों के अनुसार अगस्त में खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति 3.84 प्रतिशत रही। इस दौरान सब्जियों की मुद्रास्फीति 7.03 प्रतिशत और दलहन की 9.86 प्रतिशत रही।
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आंकड़े के अनुसार अंडा, मांस और मछली की मुद्रास्फीति 6.23 प्रतिशत पर रही।
इस दौरान आलू के दाम 82.93 प्रतिशत बढ़े। हालांकि, प्याज 34.48 प्रतिशत सस्ता हुआ।
समीक्षाधीन महीने में ईंधन और बिजली की मुद्रास्फीति घटकर 9.68 प्रतिशत रह गई। इससे पिछले महीने यानी जुलाई में यह 9.84 प्रतिशत थी।
हालांकि, इस दौरान विनिर्मित उत्पादों की मुद्रास्फीति बढ़कर 1.27 प्रतिशत हो गई, जो जुलाई में 0.51 प्रतिशत थी।
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(The above story first appeared on LatestLY on Sep 14, 2020 10:37 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

