देश की खबरें | लोगों का जीवन सुरक्षित रखने के लिए लोकल ट्रेन यात्रा पर प्रतिबंध लगाया गया: महाराष्ट्र सरकार ने अदालत से कहा
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. कोविड-19 महामारी के मद्देनजर मुंबई में लोकल ट्रेन यात्रा संबंधी प्रतिबंधों को सही ठहराते हुए महाराष्ट्र सरकार ने शुक्रवार को बंबई उच्च न्यायालय से कहा कि कल्याणकारी राज्य होने के नाते नागरिकों का जीवन सुरक्षित रखना उसकी जिम्मेदारी है।
मुंबई, चार फरवरी कोविड-19 महामारी के मद्देनजर मुंबई में लोकल ट्रेन यात्रा संबंधी प्रतिबंधों को सही ठहराते हुए महाराष्ट्र सरकार ने शुक्रवार को बंबई उच्च न्यायालय से कहा कि कल्याणकारी राज्य होने के नाते नागरिकों का जीवन सुरक्षित रखना उसकी जिम्मेदारी है।
राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल अंतुरकर ने मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति एम एस कार्णिक की पीठ को बताया कि कोविड-19 के प्रसार की रोकथाम के लिए महाराष्ट्र सरकार ने टीका नहीं लगवाने वाले लोगों को शहर में लोकल ट्रेन में यात्रा करने पर रोक लगाई थी।
अंतुरकर उस जनहित याचिका पर बहस कर रहे थे, जिसमें दावा किया गया है कि टीका नहीं लगवाने वाले लोगों पर लगाया गया प्रतिबंध अवैध है और संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (डी) के तहत देश भर में स्वतंत्र रूप से घूमने के उनके मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।
सरकारी वकील ने प्रतिबंध को सही ठहराते हुए कहा कि ये जनता की भलाई के लिए है।
अंतूरकर ने कहा, ''एक कल्याणकारी राज्य के रूप में यह सुनिश्चित करना मेरी जिम्मेदारी है कि नागरिकों का जीवन सुरक्षित रहे। मैं नहीं चाहता कि श्री ओझा के मुवक्किल (याचिकाकर्ता) सहित किसी की भी मौत हो।''
उन्होंने दलील दी कि सरकार ने एक व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता, पसंद और अधिकारों के बजाय व्यापक तौर पर जन सुरक्षा को वरीयता दी।
हालांकि, पीठ ने राज्य सरकार से उस बैठक का ब्यौरा प्रस्तुत करने के लिए कहा जिसमें बिना टीकाकरण वाले लोगों के लोकल ट्रेन यात्रा पर प्रतिबंध समेत कोविड संबंधी मानक संचालन प्रक्रिया के बारे में निर्णय लिया गया।
अदालत में मामले की अगली सुनवायी सात फरवरी को होगी।
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