रिजर्व बैंक के नये उपायों से बढ़ेगी नकदी उपलब्धता, एनबीएफसी को मिलेगी मदद: बैंकिंग विशेषज्ञ

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के चेयरमैन तथा इंडियन बैंक्स एसोसिएशन के प्रमुख रजनीश कुमार ने कहा कि यह बाजार में उभर रही परिस्थितियों को लेकर सही प्रतिक्रिया है। उन्होंने कहा, ‘‘कुल मिलाकर रिजर्व बैंक के उपायों का यह दूसरा पैकेज नीतिगत व धन की उपालब्धता बढाने का बहुत अच्छा समिश्रण है।’ उनकी राय में दीर्घकालिक रेपो दर आधारित लाक्षित ऋण सुविधा (टारगेटेड एलटीआरओ) की दूसरी खेप से एनबीएफसी और एमएफआई को मदद मिलेगी।’’

मुंबई, 17 अप्रैल बैंकिंग व वित्त जगत के विशेषज्ञों ने कोरोना वायरस महामारी के त्रस्त अर्थव्यवस्था को राहत पहुंचाने के रिजर्व बैंक के उपायों की दूसरी फेहरिस्त का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इससे प्रणाली में नकदी की उपलब्धता बढ़ेगी तथा गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) व सूक्ष्म वित्त संस्थानों (एमएफआई) को मदद मिलेगी।

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के चेयरमैन तथा इंडियन बैंक्स एसोसिएशन के प्रमुख रजनीश कुमार ने कहा कि यह बाजार में उभर रही परिस्थितियों को लेकर सही प्रतिक्रिया है। उन्होंने कहा, ‘‘कुल मिलाकर रिजर्व बैंक के उपायों का यह दूसरा पैकेज नीतिगत व धन की उपालब्धता बढाने का बहुत अच्छा समिश्रण है।’ उनकी राय में दीर्घकालिक रेपो दर आधारित लाक्षित ऋण सुविधा (टारगेटेड एलटीआरओ) की दूसरी खेप से एनबीएफसी और एमएफआई को मदद मिलेगी।’’

इंडियन बैंक की प्रबंध निदेशक व मुख्य कार्यकारी पद्मजा चुंदरू ने कहा कि रिजर्व बैंक का लहजा संवेदानाओं से परिपूर्ण है और जरूरतमंद क्षेत्रों के लिये मददगार है। उन्होंने कहा कि गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) के प्रावधान में 90 दिन की छूट से छोटे कारोबारों तथा खुदरा कर्जदारों को मदद मिलेगी। इसके साथ ही एनसीएलटी के पास मामला ले जाने में 90 दिन की छूट देने से बैंकों को 20 प्रतिशत का प्रावधान करने से बचाव मिलेगा।

स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक के मुख्य कार्यकारी (भारत) जरीन दारुवाला ने इन उपायों को एक ही महीने में रिजर्व बैंक के द्वारा अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने वाला दूसरा उपक्रम करार दिया। उन्होंने कहा कि एलसीआर कम करने तथा एनपीए को लेकर राहत देने से नकदी की उपलब्धता की भावना में सुधार होगा।

यस एसेट मैनेजमेंट इंडिया लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कंवर विवेक ने कहा कि मुख्य नीतिगत दर में बदलाव किये बिना रिवर्स रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती करने से अर्थव्यवस्था के उत्पादक क्षेत्रों तक नकदी की बेहतर पहुंच सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा, ‘‘इसके अलावा राज्यों के लिये कर्ज जुटाने के विभिन्न उपायों की सीमा 31 मार्च 2020 के स्तर से 60 प्रतिशत बढ़ाने से राज्यों की अल्पकालिक नकदी समस्याएं आसान होंगी।’’

एंजल ब्रोकिंग लिमिटेड के वरिष्ठ शोध विश्लेषक (इक्विटी) जयकिशन परमार ने कहा कि रिजर्व बैंक ने एनपीए को लेकर राहत प्रदान करते हुए प्रणाली में नकदी की उपलब्धता का ध्यान रखा है। उन्होंने कहा, ‘‘यह कदम कुछ हद तक पूंजी पर दबाव कम करेगी। लॉकडाउन के बाद एनबीएफसी को नकदी समर्थन को लेकर चिंताएं थीं। नाबार्ड, सिडबी और एनएचबी के लिये विशेष प्रबंध किये जाने से एनबीएफसी और एचएफसी का वित्तपोषण सुनिश्चित होगा।’’

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