शोध: नींद की कमी से महिलाओं में बढ़ता है मधुमेह का खतरा
एक शोध के मुताबिक महिलाओं में खासकर मेनोपॉज के बाद पर्याप्त नींद नहीं लेने से मधुमेह का खतरा हो सकता है.
एक शोध के मुताबिक महिलाओं में खासकर मेनोपॉज के बाद पर्याप्त नींद नहीं लेने से मधुमेह का खतरा हो सकता है.कोलंबिया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में निष्कर्षों में पाया गया कि छह सप्ताह तक 90 मिनट की नींद की कमी से फास्टिंग इंसुलिन का स्तर कुल मिलाकर 12 प्रतिशत से अधिक बढ़ गया.
मेनोपॉज के बाद महिलाओं में इसका प्रभाव और भी अधिक स्पष्ट 15 प्रतिशत से अधिक था. सर्वोत्तम स्वास्थ्य के लिए नींद की अनुशंसित मात्रा प्रति रात सात से नौ घंटे के बीच है.
डायबिटीज केयर जर्नल में प्रकाशित शोध, दिखाने वाला पहला अध्ययन है कि छह सप्ताह तक बनी रहने वाली हल्की नींद की कमी, शरीर में बदलाव का कारण बनती है, जिससे महिलाओं में मधुमेह विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है. ऐसा माना जाता है कि खराब नींद का पुरुषों की तुलना में महिलाओं के कार्डियोमेटाबोलिक स्वास्थ्य पर अधिक प्रभाव पड़ता है.
यूनिवर्सिटी के वेगेलोस कॉलेज ऑफ फिजिशियन एंड सर्जन्स में पोषण चिकित्सा की एसोसिएट प्रोफेसर मैरी-पियरे सेंट-ओंज ने कहा, "अपने पूरे जीवनकाल में महिलाओं को बच्चे पैदा करने, पालन-पोषण और मेनोपॉज के कारण अपनी नींद की आदतों में कई बदलावों का सामना करना पड़ता है." उन्होंने आगे कहा, "पुरुषों की तुलना में अधिक महिलाओं की यह धारणा है कि उन्हें पर्याप्त नींद नहीं मिल रही है."
अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने 38 स्वस्थ महिलाओं को नामांकित किया, जिनमें 11 पोस्टमेनोपॉजल महिलाएं भी शामिल थीं, जो नियमित रूप से हर रात कम से कम सात घंटे सोती थीं.
अध्ययन में प्रतिभागियों को रैंडम क्रम में दो अध्ययन चरणों से गुजरना पड़ा. एक चरण में उन्हें अपनी पर्याप्त नींद बनाए रखने के लिए कहा गया, दूसरे में उन्हें अपने सोने के समय में डेढ़ घंटे की देरी करने के लिए कहा गया, जिससे उनकी कुल नींद का समय लगभग छह घंटे कम हो गया. इनमें से प्रत्येक चरण छह सप्ताह तक चला.
कुल मिलाकर इंसुलिन प्रतिरोध लगभग 15 प्रतिशत और मेनोपॉज महिलाओं में 20 प्रतिशत से अधिक बढ़ गया. पूरे अध्ययन के दौरान सभी प्रतिभागियों के लिए औसत रक्त शर्करा का स्तर स्थिर रहा.
सेंट-ओंज ने कहा, "लंबे समय तक इंसुलिन उत्पादक कोशिकाओं पर चल रहे तनाव के कारण वे विफल हो सकते हैं, जिससे आखिरकार टाइप 2 मधुमेह हो सकता है."
हालांकि पेट की बढ़ी हुई चर्बी इंसुलिन प्रतिरोध का एक प्रमुख चालक है, शोधकर्ताओं ने पाया कि इंसुलिन प्रतिरोध पर नींद की कमी का प्रभाव वसा में वृद्धि के कारण नहीं था.
सेंट-ओंज ने कहा, "तथ्य यह है कि हमने इन परिणामों को शरीर में वसा में किसी भी बदलाव से स्वतंत्र देखा है, जो टाइप 2 मधुमेह के लिए एक ज्ञात जोखिम कारक है, जो इंसुलिन-उत्पादक कोशिकाओं और चयापचय पर हल्की नींद में कमी के प्रभाव को दर्शाता है."
एए/सीके (रॉयटर्स)
(The above story first appeared on LatestLY on Nov 15, 2023 05:10 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

