देश की खबरें | असम के बाढ़ग्रस्त इलाकों में लोगों के लिए आशा की किरण बने बचावकर्मी
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गुवाहाटी, एक जुलाई बाढ़ के कारण अपने घरों और कुछ मामलों में तो प्रियजनों को खो चुकी असम की बेसहाय आबादी के लिए चटक नारंगी रंग की जीवनरक्षक जैकेट पहने बचाव कर्मी आशा की इकलौती किरण हैं, जो उन्हें भोजन के पैकेट बांट रहे हैं।
राज्य के 32 जिलों में करीब 86 लाख लोग इस साल भारी बारिश और उसके बाद आयी बाढ़ से प्रभावित हैं, जिससे कई हिस्सों में जनजीवन ठप पड़ गया है और 150 से अधिक लोग जान गंवा चुके हैं।
बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित शहरों में से एक सिलचर में मधुमेह से पीड़ित 68 वर्षीय मंजूरानी नाथ अपने बीमार पति के साथ बाहर निकलने का रास्ता तलाश रही होती है कि तभी एनडीआरएफ कर्मी उनकी मदद के लिए पहुंचते हैं।
नाथ के घर में बाढ़ का पानी घुस गया है। उन्होंने कहा कि एनडीआरएफ कर्मियों ने लंबे इंतजार के बाद उन्हें भोजन और अन्य सुविधाएं मुहैया करायी जो ‘स्वर्ग से मिले अन्न’ से कम नहीं है।
असम में आयी अभूतपूर्व बाढ़ से कई इलाके, गांव जलमग्न हो गए हैं और फसलें तथा इमारतें क्षतिग्रस्त हो गयी हैं।
लोअर असम के बारपेटा जिले में रुपाकुची गांव में सबेरा बेगम और पांच लोगों के उनके परिवार का ज्यादातर सामान बाढ़ में बह गया है लेकिन उन्होंने संकट के इस समय में एक-दूसरे का हाथ थाम रखा है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमें कोई खरोंच या चोट आए बिना बाहर निकलने का मौका मिला जो किसी चमत्कार से कम नहीं है और इसके लिए बचावकर्मियों का शुक्रिया अदा।’’
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), सेना और अर्द्धसैन्य बलों के कर्मियों ने पुलिसकर्मियों, दमकल अधिकारियों और प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की मदद से ब्रह्मपुत्र और बराक नदी के बाढ़ से प्रभावित इलाकों से पिछले हफ्तों में कुल 97,993 लोगों को बचाया है।
एनडीआरएफ की पहली बटालियन के सहायक कमांडेंट संतोष सिंह ने कहा कि उसके कर्मी बाढ़ग्रस्त राज्य के संवदेनशील जिलों में अहम स्थानों पर तैनात हैं। उन्होंने बताया कि अभी असम में एनडीआरएफ के 22 दल तैनात हैं, जिनमें से नौ दल सिलचर में हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘कुछ प्रभावित जिलों में रात भर चलने वाले अभियानों में प्रभावित लोगों को बचाने के लिए 600 प्रशिक्षित कर्मी तैनात हैं। 20,000 से अधिक लोगों को बचा लिया गया है और नौ को डूबने से बचाया गया है।’’
सिंह ने बताया कि बचाव कर्मियों के साथ एक चिकित्सा दल ने गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों समेत प्रभावित लोगों को ‘अस्पताल ले जाने से पूर्व का उपचार’ मुहैया कराया।
उन्होंने कहा, ‘‘कई चुनौतियां हैं, खासतौर से पानी के तेज बहाव और अचानक आयी बाढ़ को देखते हुए। हमारे दलों का मनोबल ऊंचा है। वे लोगों को बचाने के लिए चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं और कई बार तो अपनी जान भी जोखिम में डाल रहे हैं।’’
भारतीय वायु सेना ने प्रभावित इलाकों में भोजन के पैकेट, पीने के पानी की बोतलें और अन्य आवश्यक सामान गिराए हैं। उसने सिलचर में कम से कम 300 लोगों को हवाई मार्ग से निकाला और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर लेकर गयी।
असम के पुलिस महानिदेशक भास्कर ज्योति महंत ने कहा कि एसडीआरएफ, दमकल और आपात सेवाओं के साथ ही अन्य पुलिसकर्मी भी युद्ध स्तर पर लोगों को बचा रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘बाढ़ग्रस्त गांवों में बचाव अभियान के दौरान हमारे दो पुलिसकर्मी बह गए। अगले दिन उनके शव बरामद किए गए। हमारे पुलिसकर्मी चुपचाप काम करते हैं। जब ऐसी कोई त्रासदी होती है तभी उनकी कठिन मेहनत और बलिदान सामने आता है।’’
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