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जरुरी जानकारी | खाद्य तेलों की कम आपूर्ति से सरसों तेल-तिलहन, बिनौला तेल में सुधार

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. विदेशी बाजारों में तेजी के रुख और मंडियों में कम आपूर्ति की स्थिति के बीच दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में बुधवार को सरसों तेल-तिलहन और बिनौला तेल कीमतों में मजबूती आई जबकि सामान्य कारोबार के बीच मूंगफली, सोयाबीन तेल-तिलहन, सीपीओ और पामोलीन तेल कीमतों के भाव पूर्वस्तर पर बंद हुए।

जरुरी जानकारी | खाद्य तेलों की कम आपूर्ति से सरसों तेल-तिलहन, बिनौला तेल में सुधार

नयी दिल्ली, 26 अक्टूबर विदेशी बाजारों में तेजी के रुख और मंडियों में कम आपूर्ति की स्थिति के बीच दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में बुधवार को सरसों तेल-तिलहन और बिनौला तेल कीमतों में मजबूती आई जबकि सामान्य कारोबार के बीच मूंगफली, सोयाबीन तेल-तिलहन, सीपीओ और पामोलीन तेल कीमतों के भाव पूर्वस्तर पर बंद हुए।

सूत्रों ने कहा कि बुधवार को मलेशिया और शिकॉगो एक्सचेंज में कारोबार हुआ। मलेशिया एक्सचेंज में आधा प्रतिशत की तेजी है जबकि कल रात शिकॉगो एक्सचेंज लगभग तीन प्रतिशत मजबूत बंद हुआ और फिलहाल यह 1.25 प्रतिशत तेज है। उन्होंने बताया कि खाद्य तेलों की घरेलू आपूर्ति बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा सालाना 20-20 लाख टन के शुल्क-मुक्त आयात की छूट दिए जाने के बाद बाजार में कम आपूर्ति (शॉर्ट सप्लाई) की स्थिति पैदा हो गई है और इस तेजी का असर बाकी तेल-तिलहन कीमतों पर भी हुआ है। सरकार के फैसले से न तो किसान, न ही तेल उद्योग और न ही उपभोक्ताओं को कोई फायदा है इसलिए सरकार को तत्काल अपने कोटा निर्धारित करने के फैसले की समीक्षा करनी चाहिये।

सूत्रों ने कहा कि सरकार को इसलिए इसपर शीघ्र कोई निर्णय लेना होगा क्योंकि सीपीओ और पामोलीन के आयात का माल बंदरगाह पहुंचने में 10-15 दिन लगते हैं जबकि सोयाबीन और सूरजमुखी जैसे हल्के तेलों के आयात करने में डेढ़ से दो महीने का समय लगता है।

सूत्रों ने कहा कि तेल उद्योग के प्रमुख संगठन साल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (एसईए) ने सरकार से केवल सीपीओ, पामोलीन तेल पर आयात शुल्क बढ़ाने की मांग की है। सूत्रों ने कहा कि इस संगठन को सूरजमुखी और सोयाबीन तेल का भी जिक्र करना चाहिये था। सूत्रों ने सरकार से इन तेलों के आयात की कोटा प्रणाली को समाप्त करते हुए इन तेलों पर 10-15 प्रतिशत का आयात शुल्क लगा देना चाहिये। इस कदम से जो सूरजमुखी तेल उपभोक्ताओं को 30-40 रुपये लीटर महंगा मिल रहा है, वह सस्ता होगा, सरकार को राजस्व की प्राप्ति होगी और किसान के साथ-साथ तेल उद्योग को भी फायदा होगा।

सूत्रों ने कहा कि दिवाली के मौके पर गुजरात में सप्ताह भर बाजार के बंद रहने की वजह से लिवाल नदारद हैं जिस कारण मूंगफली तेल-तिलहन कीमतें पूर्वस्तर पर बनी रहीं। बाजार में शॉर्ट सप्लाई और हल्की मांग के बीच मूंगफली, सोयाबीन तेल-तिलहन, सीपीओ और पामोलीन तेल के भाव पूर्वस्तर पर बने रहे। शार्ट सप्लाई के कारण बिनौला तेल के साथ सरसों तेल-तिलहन कीमतों में भी सुधार दर्ज हुआ।

बुधवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन - 7,135-7,160 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली - 6,870-6,935 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 16,000 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल 2,560-2,820 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 14,850 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 2,270-2,400 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 2,340-2,455 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,800-20,500 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 14,400 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 14,150 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 12,700 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 9,120 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 13,250 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 10,750 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 9,820 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना - 5,310-5,360 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज 5,110-5,160 रुपये प्रति क्विंटल।

मक्का खल (सरिस्का) 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।

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(The above story first appeared on LatestLY on Oct 26, 2022 08:22 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).