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जरुरी जानकारी | शादी-ब्याह की मांग बढ़ने से लगभग सभी तेल-तिलहनों में सुधार

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. देश में शादी-विवाह तथा जाड़े के मौसम की मांग बढ़ने के कारण देशभर के तेल-तिलहन बाजारों में शुक्रवार को सरसों, सोयाबीन, मूंगफली, बिनौला, सीपीओ और पामोलीन तेल-तिलहन कीमतें सुधार का रुख दर्शाती बंद हुईं। बाकी तेल-तिलहन के भाव अपरिवर्तित रहे।

जरुरी जानकारी | शादी-ब्याह की मांग बढ़ने से लगभग सभी तेल-तिलहनों में सुधार

नयी दिल्ली, 19 नवंबर देश में शादी-विवाह तथा जाड़े के मौसम की मांग बढ़ने के कारण देशभर के तेल-तिलहन बाजारों में शुक्रवार को सरसों, सोयाबीन, मूंगफली, बिनौला, सीपीओ और पामोलीन तेल-तिलहन कीमतें सुधार का रुख दर्शाती बंद हुईं। बाकी तेल-तिलहन के भाव अपरिवर्तित रहे।

बाजार सूत्रों ने कहा कि जाड़े के मौसम में हल्के तेलों की मांग बढ़ने, शादी-विवाह के मौसम की मांग के कारण लगभग सभी तेल-तिलहनों के भाव लाभ के साथ बंद हुए। उन्होंने कहा कि देशभर की मंडियों में सरसों की आवक 1.35 लाख बोरी से घटकर लगभग एक लाख बोरी रह गई है। उधर, खुदरा तेल पेराई मिलों की दैनिक मांग 1.25 लाख बोरी से बढ़कर लगभग 1.35 लाख बोरी हो गई है। थोड़ी बहुत सरसों की उपज किसानों के पास ही है जबकि सरसों की अगली परिपक्व फसल आने में तीन से साढ़े तीन माह का समय है।

उन्होंने कहा कि सरसों और चने का वायदा कारोबार नहीं खोला जाना चाहिये और इससे सरसों फसल की अगली पैदावार उम्मीद से भी कहीं ज्यादा होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि बड़े कारोबारी वायदा कारोबार का इस्तेमाल फसल के तैयार होने के समय इसके भाव गिराकर किसानों को सस्ते में अपनी उपज बेचने को मजबूर करने के लिए करते हैं।

सूत्रों ने कहा कि सोयाबीन के मामले में किसान कम भाव पर अपनी फसल बेचने को तैयार नहीं हैं, क्योंकि उन्हें सोयाबीन बीज के लिए अधिक लागत खर्च करनी पड़ी थी। सोयाबीन उत्पादकों के प्रमुख संगठन सोपा ने ऑल इंडिया पॉल्ट्री एसोसिएशन की सोयाबीन के आयात की अवधि बढ़ाने की मांग के बारे में कहा कि इस बार देश में सोयाबीन का उत्पादन बढ़िया हुआ है और सरकार को कोई भी फैसला किसानों के हित को ध्यान में रखकर करना चाहिये।

इस बीच, शादी-विवाह के मौसम के दौरान मांग बढ़ने से सीपीओ और पामोलीन तेल के भाव भी सुधार दर्शाते बंद हुए।

सूत्रों ने कहा कि सरसों खली में तेजी जारी है और सरसों की कम उपलब्धता के कारण इसका भाव एक हफ्ते में 3,300 रुपये से बढ़कर 3,425 रुपये क्विंटल हो गया है। उन्होंने कहा कि सरकार को विशेषकर उत्तरी भारत के राज्यों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के माध्यम से सरसों उपलब्ध कराने के बारे में विचार करना चाहिये।

उन्होंने कहा कि हल्के तेलों की मांग बढ़ने से बिनौला तेल और मूंगफली तेल-तिलहनों के भाव लाभ के साथ बंद हुए।

बाकी तेल-तिलहनों के भाव अपरिवर्तित रहे।

बाजार में थोक भाव इस प्रकार रहे- (भाव- रुपये प्रति क्विंटल)

सरसों तिलहन - 9,065 - 9,095 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये।

मूंगफली - 6,000 - 6,085 रुपये।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात)- 13,400 रुपये।

मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड तेल 1,960 - 2,085 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 17,860 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 2,755 -2,780 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 2,835 - 2,945 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी - 16,700 - 18,200 रुपये।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 13,640 रुपये।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 13,210 रुपये।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 12,000

सीपीओ एक्स-कांडला- 11,430 रुपये।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 12,550 रुपये।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 12,960 रुपये।

पामोलिन एक्स- कांडला- 11,800 (बिना जीएसटी के)।

सोयाबीन दाना 6,150 - 6,200, सोयाबीन लूज 6,075 - 6,125 रुपये।

मक्का खल (सरिस्का) 3,825 रुपये।

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(The above story first appeared on LatestLY on Nov 19, 2021 06:13 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).