जरुरी जानकारी | राष्ट्रीय महत्व की कृषि मंडी के लिए कानूनी ढांचे की सिफारिश
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. राष्ट्रीय महत्व की कृषि मंडी (एमएनआई) के माध्यम से मंडियों और राज्यों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने के लिए गठित एक विशेषज्ञ समिति ने प्रस्तावित मंच को लेकर कार्यान्वयन और कानूनी ढांचे की सिफारिश की है।
नयी दिल्ली, पांच जुलाई राष्ट्रीय महत्व की कृषि मंडी (एमएनआई) के माध्यम से मंडियों और राज्यों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने के लिए गठित एक विशेषज्ञ समिति ने प्रस्तावित मंच को लेकर कार्यान्वयन और कानूनी ढांचे की सिफारिश की है।
केंद्र ने एमएनआई की अवधारणा और कार्यान्वयन के माध्यम से मंडियों और राज्यों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने के लिए 21 अप्रैल, 2023 को एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया था।
समिति की अध्यक्षता कर्नाटक सरकार के विशेष सचिव (कृषि) मनोज राजन ने की। इसमें उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान, तेलंगाना, ओडिशा और बिहार के राज्य कृषि विपणन बोर्ड के सदस्य शामिल थे।
इसमें राज्य के प्रतिनिधियों के अलावा, निदेशक (कृषि विपणन) समेत अन्य शामिल थे। समिति को एमएनआई के कार्यान्वयन के लिए रूपरेखा की सिफारिश करने का काम सौंपा गया था।
एक सरकारी बयान में कहा गया है कि चार जुलाई, 2023 को विशेषज्ञ समिति के अध्यक्ष ने एमएनआई मंच को लेकर रिपोर्ट दी है। समिति ने एमएनआई मंच के कार्यान्वयन, कानूनी ढांचे, विवाद समाधान प्रणाली आदि की सिफारिश की है।
इसमें कहा गया है कि यह मंच भागीदार राज्यों के किसानों को अपनी अधिशेष उपज को राज्य की सीमाओं से परे बेचने का अवसर प्रदान करेगा।
इसमें कहा गया है, ‘‘ई-नाम (राष्ट्रीय कृषि बाजार) अप्रैल 2016 में शुरु किये जाने के बाद से एक लंबा सफर तय कर चुका है। अब तक, 23 राज्यों और 4 केंद्रशासित प्रदेशों की 1,361 मंडियों को ई-नाम प्लेटफॉर्म पर एकीकृत किया गया है।’’
तीन जुलाई, 2023 तक 1.75 करोड़ से अधिक किसान और 2.45 लाख व्यापारी ई-नाम पोर्टल पर पंजीकृत हो चुके हैं। ई-नाम प्लेटफॉर्म पर 2.79 लाख करोड़ रुपये का व्यापार दर्ज किया गया है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)