देश की खबरें | आर सी पी सिंह ने भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद जदयू छोड़ी

पटना, छह अगस्त पूर्व केंद्रीय मंत्री आर सी पी सिंह ने शनिवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जनता दल (यूनाइटेड) छोड़ दी। इसके कुछ घंटे पहले यह खबर आयी थी कि पार्टी ने कुछ अज्ञात कार्यकर्ताओं द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों पर उनसे स्पष्टीकरण मांगा है।

सिंह ने जदयू में शामिल होने के लिए 12 वर्ष पहले भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी। उन्होंने करीब डेढ़ वर्ष पहले जदयू का नेतृत्व भी किया।

जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सिंह को पार्टी द्वारा राज्यसभा का एक और कार्यकाल देने से इनकार करने के बाद केंद्रीय मंत्रिपद छोड़ना पड़ा था। उन्होंने पार्टी छोड़ने की घोषणा नालंदा जिले स्थित अपने पैतृक आवास पर आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में की।

जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा द्वारा अज्ञात पार्टी कार्यकर्ताओं की शिकायतों का हवाला देते हुए जारी किए उस पत्र की सामग्री से अच्छी तरह वाकिफ प्रतीत हो रहे सिंह ने दावा किया, ‘‘मैं इसे अब और सहन नहीं कर सकता, हालांकि मुझे अभी तक पत्र प्राप्त नहीं हुआ है।’’ शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि नेता ने 2013 के बाद से ‘‘बड़ी संपत्ति’’ अर्जित की।

सिंह ने कहा, ‘‘आईएएस के साथ-साथ राजनीति में भी मेरा करियर अच्छा रहा है। कोई भी कभी भी मेरी ईमानदारी पर उंगली नहीं उठा पाया।’’

यह पूछे जाने पर कि क्या वह अब जदयू के गठबंधन सहयोगी भाजपा में शामिल होने का इरादा रखते हैं, जिसके बारे में उन पर बहुत करीब होने का आरोप लगाया गया है, सिंह ने कहा कि उन्होंने अभी तक अपना मन नहीं बनाया है।

सिंह ने हालांकि कुमार की प्रधानमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा पर तंज कसते हुए कहा, ‘‘वह (प्रधानमंत्री) नहीं बनेंगे, भले ही उनका सात बार पुनर्जन्म हो।’’

उन्होंने कहा, ‘‘आरोप उन लोगों द्वारा एक साजिश है, जिन्होंने मुझे केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किये जाने से ईर्ष्या की थी। मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि कांच के घरों में रहने वालों को दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकने चाहिए। मैं पार्टी की अपनी प्राथमिक सदस्यता भी छोड़ रहा हूं।’’

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) ने पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों पर अपने पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आर सी पी सिंह से स्पष्टीकरण मांगा था।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने पूर्व केंद्रीय मंत्री सिंह से जवाब मांगा। सिंह का हाल में राज्यसभा का कार्यकाल खत्म हो गया, लेकिन पार्टी ने उन्हें फिर से सदन के लिए नहीं भेजा।

कुशवाहा ने पत्र में लिखा था, ‘‘आप अच्छी तरह से जानते हैं कि हमारे माननीय नेता (मुख्यमंत्री) भ्रष्टाचार के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस (तनिक भी सहन नहीं करने)’ की नीति के साथ काम कर रहे हैं और वह अपने लंबे राजनीतिक करियर में बेदाग रहे हैं।’’ पत्र के साथ पार्टी के अज्ञात कार्यकर्ताओं द्वारा सिंह के खिलाफ की गई शिकायत को भी संलग्न किया गया है।

जदयू कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि सिंह और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर 2013 और 2022 के बीच ‘‘अकूत संपत्ति’’ अर्जित की गई।

पत्रकारों के एक सवाल पर जदयू संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने कहा था, ‘‘यह खुलासा करना उचित नहीं है कि आरोप किसने लगाए हैं, लेकिन स्पष्टीकरण मांगा गया है। पार्टी उनके जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेगी।’’

एक सवाल के जवाब में कुशवाहा ने कहा कि जांच एजेंसियां इस मामले में स्वत: संज्ञान लेने के लिए स्वतंत्र हैं, जिसके बारे में उन्हें मीडिया के जरिए पता चला होगा। हालांकि, यह पूछे जाने पर कि क्या यह घटनाक्रम पार्टी के पूर्व अध्यक्ष के लिए पार्टी में दरवाजे बंद होने का संकेत है, कुशवाहा ने कहा, ‘‘यह एक राजनीतिक सवाल है। पार्टी इस मामले को राजनीतिक रूप से नहीं देख रही है।’’

भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के उत्तर प्रदेश कैडर के पूर्व अधिकारी सिंह ने 1990 के दशक के अंत में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर रहते हुए नीतीश कुमार का विश्वास जीता था, जब कुमार केंद्रीय मंत्री थे। सिंह ने राजनीति में आने के लिए 2010 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी।

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