जरुरी जानकारी | आरबीआई का बैंक, एनबीएफसी के एआईएफ में निवेश के लिए नियमों को आसान बनाने का प्रस्ताव

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. भारतीय रिजर्व बैंक ने सोमवार को बैंकों, एनबीएफसी और उसके दायरे में आने वाली इकाइयों के लिए वैकल्पिक निवेश कोष में निवेश के मानदंडों को सुगम बनाने का प्रस्ताव किया।

मुंबई, 19 मार्च भारतीय रिजर्व बैंक ने सोमवार को बैंकों, एनबीएफसी और उसके दायरे में आने वाली इकाइयों के लिए वैकल्पिक निवेश कोष में निवेश के मानदंडों को सुगम बनाने का प्रस्ताव किया।

केंद्रीय बैंक ने दिसंबर, 2023 में उसके दायरे में आने वाली इकाइयों के लिए वैकल्पिक निवेश कोष (एआईएफ) में निवेश से संबंधित दिशानिर्देश जारी किये थे। इसका उद्देश्य इस मार्ग के माध्यम से ऋण चुकाने के लिए कर्ज लेने की गतिविधियों की आशंका से जुड़ी चिंताओं को दूर करना था।

आरबीआई ने कहा, ‘‘समीक्षा करने पर, यह पाया गया है कि रिजर्व बैंक के नियामकीय उपायों से एआईएफ में निवेश के संबंध में बैंकों और एनबीएफसी (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियो) के बीच वित्तीय अनुशासन आया है।’’

इसके अलावा, शेयर बाजार नियामक सेबी ने भी निवेशकों और एआईएफ के निवेश के संबंध में अन्य बातों के साथ-साथ विशिष्ट जांच-पड़ताल की जरूरत को लेकर दिशानिर्देश जारी किये हैं। इसका मकसद यह सुनिश्चत करना है कि नियमों का उल्लंघन नहीं हो।

इन घटनाक्रमों के मद्देनजर, भारतीय रिजर्व बैंक ने सोमवार को विभिन्न पक्षों और जनता से सुझाव के लिए एआईएफ में बैंकों, एनबीएफसी और उसके दायरे में आने वाले अन्य संस्थानों (आरई) के निवेश पर संशोधित मसौदा निर्देश जारी किये।

आरबीआई ने प्रस्ताव दिया है कि किसी भी एआईएफ योजना में किसी एक बैंक या एनबीएफसी का योगदान उसके कोष के 10 प्रतिशत पर सीमित होना चाहिए। सामूहिक रूप से, एआईएफ योजना में आरबीआई के दायरे में आने वाली इकाइयों द्वारा निवेश के लिए 15 प्रतिशत की सीमा लागू होगी।

इसके अलावा, एआईएफ योजना के कोष के पांच प्रतिशत तक के निवेश पर कोई पाबंदी नहीं होगी।

मसौदे में कहा गया, ‘‘यदि किसी बैंक या एनबीएफसी का निवेश योजना के कोष के पांच प्रतिशत से अधिक है और यदि योजना में उसकी (बैंक या एनबीएफसी) देनदार कंपनी (इक्विटी शेयर, अनिवार्य रूप से परिवर्तनीय वरीयता शेयर और अनिवार्य रूप से परिवर्तनीय डिबेंचर को छोड़कर) में ‘डाउनस्ट्रीम’ ऋण निवेश है, तो संबंधित बैंक या एनबीएफसी को अपने आनुपातिक जोखिम की सीमा तक 100 प्रतिशत प्रावधान करने की आवश्यकता होगी।’’

किसी भारतीय कंपनी (जिसका स्वामित्व या नियंत्रण विदेशी इकाई के पास है) का किसी अन्य भारतीय इकाई में किया गया निवेश अप्रत्यक्ष विदेशी निवेश माना जाता है। इसे ‘डाउनस्ट्रीम’ के नाम से भी जाना जाता है।

आरबीआई ने प्रस्ताव किया है कि वह सरकार के परामर्श से कुछ एआईएफ को छूट दे सकता है, जिन्हें रणनीतिक उद्देश्यों के लिए स्थापित किया गया है।

केंद्रीय बैंक ने आठ जून, 2025 तक मसौदा निर्देशों पर सुझाव मांगे हैं।

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