देश की खबरें | राष्ट्रीय अभिलेखागार में लगी प्रदर्शनी में महात्मा गांधी से जुड़े दुर्लभ दस्तावेज प्रदर्शित
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. महात्मा गांधी ने वर्ष 1920 में शुरू हुए खिलाफत आंदोलन के समर्थन में उस समय प्रतिष्ठित माने जाने वाले ‘कैसर ए हिंद’ पदक और दो युद्ध पदकों को ब्रिटिश हुकूमत को यह कहते हुए लौटा दिया था कि जब तक देश के मुस्लिम ‘‘उनकी धार्मिक भावना के साथ किए गलत’’ से दबे रहेंगे तबतक ‘‘उनकी अंतरआत्मा ’’ इन्हें धारण नहीं करने देगी।
नयी दिल्ली, 23 अगस्त महात्मा गांधी ने वर्ष 1920 में शुरू हुए खिलाफत आंदोलन के समर्थन में उस समय प्रतिष्ठित माने जाने वाले ‘कैसर ए हिंद’ पदक और दो युद्ध पदकों को ब्रिटिश हुकूमत को यह कहते हुए लौटा दिया था कि जब तक देश के मुस्लिम ‘‘उनकी धार्मिक भावना के साथ किए गलत’’ से दबे रहेंगे तबतक ‘‘उनकी अंतरआत्मा ’’ इन्हें धारण नहीं करने देगी।
‘आजादी के अमृत महोत्सव’ के तहत राष्ट्रीय अभिलेखागार में लगाई गई प्रदर्शनी इतिहास की कुछ ऐसी ही घटनाओं और महात्मा गांधी से जुड़ी जानकारियों से अवगत कराती है । जानकारी के साथ-साथ यहां उससे जुड़े इतिहास के दुर्लभ और असली दस्तावेज भी देखे जा सकते हैं।
प्रदर्शनी में महात्मा गांधी द्वारा तत्कालीन वायसराय लॉर्ड चेम्सफोर्ड को लिखा पत्र भी है, जो उन्होंने दक्षिण अफ्रीका से लौटने के पांच साल बाद लिखा था। इस पत्र में गांधी ने औपनिवेशिक सरकार की आलोचना करते हुए कहा था कि उसने खिलाफत के मामले में ‘‘विवेकहीन, अनैतिक और अन्यापूर्ण’’ कार्य किया है।
प्रदर्शनी में दो अगस्त 1920 को लिखे इस पत्र की मूल प्रति और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े अन्य दस्तावेज प्रदर्शित किये गये हैं।
गांधी ने पत्र में लिखा है, ‘‘ मैं बिना पीड़ा के कैसर ए हिंद स्वर्ण पदक लौटा रहा हूं जो मुझे दक्षिण अफ्रीका में मेरे मानवीय कार्य के लिए आपके पूर्ववर्ती ने प्रदान किया था। मैं जुलु युद्ध पदक जो दक्षिण अफ्रीका में भारतीय स्वंयसेवक एंबुलेंस कमान 1906 में प्रभारी अधिकारी के तौर पर मेरी सेवा के लिए और बोर युद्ध पदक जो 1899-1900 में बोर युद्ध के दौरान भारतीय स्वयंसेवक स्ट्रेचर धारक कोर के सहायक अधीक्षक के तौर पर मेरी सेवा के लिए प्रदान किया गया था, को भी लौटा रहा हूं।’’
गौरतलब है कि महात्मा गांधी और उनकी पत्नी कस्तूरबा गांधी नौ जून 1915 में दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे थे। गांधीवादी संस्थान बंबई सर्वोदय मंडल की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक उसी साल उन्हें ब्रिटेन के राजा के जन्म दिन के अवसर पर कैसर ए हिंद स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया था। तत्कालीन वायसराय लॉर्ड हार्डिंग ने स्वयं महात्मा गांधी को कैसर ए हिंद स्वर्ण पदक से सम्मानित किया था।
इसी प्रदर्शनी में कई अन्य दुर्लभ दस्तावेज भी प्रदर्शित किये गये हैं जिनमें 31 मई 1919 को कवि और नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा तत्कालीन वायसराय को लिखे पत्र की मूल प्रति भी शामिल है। इस पत्र में उन्होंने जालियांवाला बाग नरसंहार के विरोध में नाइटहुड की उपाधि वापस करने की बात कही है।
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