चेन्नई, दो जून मद्रास उच्च न्यायालय ने मंगलवार को तमिलनाडु सरकार से पूछा कि जब उसने राजीव गांधी हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा काट रही नलिनी और उसके पति श्रीहरन को रिहा करने का फैसला कर लिया है तो, उसे (नलिनी को) श्रीलंका में अपनी सास से वीडियो कॉल करने की अनुमति क्यों नहीं दी जा रही है।
याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एन किरुबाकरण और न्यायमूर्ति आर हेमलता की पीठ ने यह टिप्पणी की।
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नलिनी की मां ने अदालत में याचिका दायर कर अपील की है कि उनकी बेटी और उसके पति को श्रीलंका में उसकी सास और लंदन में ननद से रोजाना दस मिनट बात करने की अनुमति देने का निर्देश दिया जाए।
याचिका में कहा गया है कि श्रीलंका के नागरिक श्रीहरन के पिता मुरुगन की हाल ही में मौत हो गई थी। लिहाजा नलिनी और मुरुगन शोकाकुल परिवार से बात करना चाहते हैं।
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पीठ ने साफ किया कि वे दोषियों के पक्ष में नहीं हैं। उसने पूछा कि जब सरकार ने इस मामले में सभी सातों दोषियों को रिहा करने का फैसला कर लिया है तो जेल अधिकारी उन्हें वीडियो कॉल करने की अनुमति देने से इनकार क्यों कर रहे हैं।
लोक अभियोजक ए नटराजन ने अदालत को बताया कि नलिनी को वीडियो कॉल करने की अनुमति इसलिए नहीं दी गई क्योंकि कैदी को विदेश में किसी व्यक्ति से बात करने की अनुमति देने का कोई प्रावधान नहीं है।
उन्होंने कहा कि इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि दोषी इस मौके का इस्तेमाल निजी और पारिवारिक मामलों के लिये करेंगे।
पीठ ने अभियोजक को जेल अधिकारियों का स्पष्ट रुख अदालत को बताने का निर्देश देते हुए मामले की सुनवाई बुधवार तक स्थगित कर दी।
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