जयपुर, 23 जुलाई राजस्थान उच्च न्यायालय ने एक प्रमुख कोचिंग संस्थान के संस्थापक डॉ. विकास दिव्यकीर्ति के खिलाफ अजमेर की एक अदालत में चल रहे मानहानि के मामले में आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी है।
न्यायमूर्ति समीर जैन की पीठ ने ‘दृष्टि आईएएस’ के संस्थापक दिव्यकीर्ति की याचिका पर कार्यवाही पर रोक लगाई है।
दिव्यकीर्ति ने अजमेर की अदालत द्वारा उनके खिलाफ मानहानि की शिकायत पर संज्ञान लेने के आदेश के विरुद्ध राजस्थान उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
दरअसल, पूरा मामला एक वीडियो से संबंधित है जिसमें दिव्यकीर्ति ने कथित तौर पर न्याय व्यवस्था और न्यायपालिका के कामकाज के बारे में कुछ टिप्पणियां की हैं। मामला तब सामने आया जब एक वकील ने अजमेर की स्थानीय अदालत में याचिका दायर की।
स्थानीय अदालत ने शिकायत पर संज्ञान लिया और उन्हें 22 जुलाई को तलब किया। हालांकि, उन्होंने व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट के लिए अर्जी दायर की जिसके बाद अदालत ने उन्हें दो अगस्त को पेश होने का निर्देश दिया।
उच्च न्यायालय में दिव्यकीर्ति का प्रतिनिधित्व वीआर बाजवा और सुमीर सोढ़ी ने किया।
वकील सोढ़ी ने कहा, "यह मामला डॉ. दिव्यकीर्ति द्वारा एक व्याख्यान के दौरान कथित तौर पर दिए गए कुछ बयानों से उत्पन्न हुआ है। यह देखते हुए कि बंद कमरे में दिए गए ऐसे बयान मानहानि कारक नहीं माने जा सकते और दिव्यकीर्ति को अपनी राय और दृष्टिकोण व्यक्त करने का मौलिक अधिकार है, राजस्थान उच्च न्यायालय ने सभी कार्यवाहियों पर रोक लगा दी है।"
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