देश की खबरें | राजस्थान : कांग्रेस विधायक भाकर विधानसभा से निलंबित, विपक्षी सदस्य धरने पर बैठे

जयपुर, पांच अगस्त राजस्थान विधानसभा में सभापति संदीप शर्मा ने मार्शलों को कांग्रेस के निलंबित विधायक मुकेश भाकर को सदन से बाहर निकालने का निर्देश दिया, जिसका विरोध करते हुए विपक्षी सदस्यों ने मार्शलों से धक्का मुक्की भी की और धरने पर बैठ गये।

कांग्रेस विधायकों ने भाकर को घेर लिया और मार्शलों को उन्हें सदन से बाहर ले जाने से रोका। इस दौरान विधायक व मार्शलों के बीच धक्का-मुक्की हुई, जिसके बाद विपक्षी सदस्यों ने आरोप लगाया कि मार्शलों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया।

कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया क‍ि इस दौरान एक महिला विधायक की चूड़ियां टूट गईं।

हालांक‍ि इस हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी गई थी लेकिन विपक्षी विधायक सदन में ही नीचे धरने पर बैठ गए। वे देर रात तक वहीं बैठे थे।

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने विधायक भाकर द्वारा ‘एक्स’ पर पोस्ट की गई एक तस्वीर साझा की। इसमें भाकर ने लिखा, “नेता प्रतिपक्ष जूली व सभी साथी विधायक इस जुल्मी सरकार के खिलाफ विधानसभा में डटे हुए हैं।”

इससे पहले मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग द्वारा लाए गए प्रस्ताव पर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने भाकर को अध्यक्ष के प्रति अभद्र व्यवहार के लिए मौजूदा सत्र की बाकी बैठकों से निलंबित कर दिया।

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आरोप लगाया कि विधानसभा में विपक्ष के विधायकों के साथ अलोकतांत्रिक व पक्षपातपूर्ण व्यवहार किया जा रहा है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

इससे पहले लोक अभियोजकों की नियुक्ति भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के बजाय दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धाराओं के तहत किए जाने को लेकर हंगामा हुआ।

अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कांग्रेस विधायकों के हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही दो बार आधे-आधे घंटे के लिए स्थगित की। इसके बाद सभापति संदीप शर्मा ने कार्यवाही मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी।

नेता प्रतिपक्ष जूली ने भोजनावकाश के बाद लोक अभियोजकों की नियुक्ति का मुद्दा सदन में उठाया और इसको लेकर सरकार से जवाब की मांग की। जूली ने कहा,“देश में सीआरपीसी 30 जून को समाप्त हो चुका है और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) एक जुलाई से लागू हो चुकी है। यानी एक जुलाई के बाद देश में नागरिक व पुलिस इस संहिता को मानने के लिए बाध्य हैं। लेकिन राजस्थान सरकार के विधि सचिव द्वारा 12 जिलों में राजकीय अधिवक्ता नियुक्त किए गए हैं जो सीआरपीसी की धारा 24 (2) के तहत किए गए हैं जबकि यह नियुक्ति बीएनएसएस की धारा 18 के तहत की जानी चाहिए थी।”

उन्होंने कहा, “इस पर सरकार का जवाब आना चाहिए था। संविधान के नियम 256 के तहत राज्य सरकार बाध्य है कि भारत सरकार के कानूनों का पालन करेगी।”

जूली ने बिना किसी का नाम लिए आरोप लगाया कि एक मंत्री के बेटे को लोक अभियोजक नियुक्त किया गया है। इसपर सत्ता पक्ष के मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने कहा कि व्यक्ति की नियुक्ति योग्यता के आधार पर हुई होगी और मंत्री का बेटा होना कोई अपराध नहीं है।

अध्यक्ष देवनानी ने कहा कि यह मुद्दा सरकार के संज्ञान में आ गया है लेकिन कांग्रेस विधायकों ने इस पर राज्य सरकार से जवाब की मांग की, लेकिन देवनानी ने नियमों का हवाला देकर इससे इनकार किया। इसको लेकर देवनानी व कांग्रेस विधायक आमने सामने आ गए।

देवनानी की नेता प्रतिपक्ष जूली व कई कांग्रेस विधायकों से नोक झोंक हो गई। कांग्रेस विधायकों की लगातार नारेबाजी के बीच उन्होंने कई बार विपक्षी सदस्यों से अपनी सीट पर जाने और इस मुद्दे को नियमों के तहत उठाने को कहा।

हालांकि कांग्रेस के विधायक नारेबाजी व हंगामा करते रहे। सरकार की ओर से मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने कहा, “मैं प्रस्ताव रखता हूं कि राजस्थान विधानसभा के सदस्य मुकेश भाकर द्वारा आज आसन की तरफ उंगली उठाकर जो अभद्र व्यवहार किया गया है उसके लिए उन्हें वर्तमान सत्र की बैठकों से निलंबित किया जाए।”

इस पर अध्यक्ष देवनानी ने कहा, “इनको (भाकर को) सदन से निलंबित किया जाता है।” इसके बाद उन्होंने सदन की कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्थगित करने की घोषणा की।

आधे घंटे बाद अपराह्न तीन बजकर 29 मिनट पर पीठासीन अधिकारी ने बिना कार्यवाही को आगे बढ़ाए सदन को और आधे घंटे के लिए स्थगित कर दिया।

शर्मा ने बाद में सदन के फिर से शुरू होने पर कांग्रेस विधायक भाकर को सदन से बाहर जाने को कहा लेकिन जब व‍िधायक नहीं गए तो उन्होंने मार्शल को उन्हें निकालने को कहा।

मार्शल व कांग्रेस के विधायकों के बीच तनातनी होने लगी तो पीठासीन अधिकारी ने सदन की कार्यवाही कल यानी मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी। इस पर विपक्षी कांग्रेस सदस्यों ने हंगामा किया और कड़ा विरोध जताया।

कांग्रेस विधायकों ने भाकर को घेरे में ले लिया और मार्शलों को उन्हें बाहर ले जाने से रोका।

महिला विधायकों ने आरोप लगाया कि मार्शलों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। कांग्रेस विधायक अनीता जाटव ने सदन के बाहर संवाददाताओं से कहा, “महिलाएं सदन में सुरक्षित नहीं हैं। सदन में महिला विधायक के साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है तो आम महिला का क्या होगा? मार्शलों ने मेरी चूड़ियां तोड़ दीं।”

नेता प्रतिपक्ष जूली ने कहा, “राजस्थान की जनता ने उन्हें सेवा करने के लिए चुना है लेकिन यहां वे (भाजपा विधायक) कानून व्यवस्था को तार-तार कर रहे हैं। हम सदन में बैठे हैं और धरना दे रहे हैं।” जूली ने कहा, “विधानसभा कर्मचारियों ने हमारी महिला विधायकों के साथ दुर्व्यवहार किया। यह सरकार की मंशा को दर्शाता है।”

सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित होने के बाद भी कांग्रेस नेताओं ने धरना जारी रखा। इस घटना पर प्रतिक्रिया जताते हुए विधायक गहलोत ने ‘एक्स’ पर कहा , “पहले विधानसभा में कांग्रेस विधायक मुकेश भाकर का निलंबन तथा जबरन निष्कासन फिर मार्शलों द्वारा वरिष्ठ विधायक हरिमोहन शर्मा को जमीन पर गिराना व विधायक अनिता जाटव से बदसलूकी कर उनकी चूड़ियां तक तोड़ देने की मैं कड़े शब्दों में निंदा करता हूं।”

विधानसभा अध्यक्ष देवनानी ने बाद में एक बयान में कहा कि सदन में चल रहे गतिरोध के दौरान ही विधायक मुकेश भाकर द्वारा आसन के प्रति अशोभनीय व्यवहार और हाथों के इशारे से अमर्यादित प्रदर्शन किया गया, जो विधानसभा में सन 1952 से लेकर अब तक के इतिहास में ऐसे किसी व्यवहार की नजीर नहीं है।

उन्होंने कहा, “प्रतिपक्ष को ऐसे सदस्य का बचाव करना, अलोकतान्त्रिक और विकास विरोधी सोच का घोतक है।”

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