जरुरी जानकारी | रेलवे का 2030 तक कार्बन उत्सर्जन शून्य करने का लक्ष्य, सौर ऊर्जा क्षेत्र के हितधारकों से की बातचीत
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. भारतीय रेलवे को 2030 तक शून्य कार्बन उत्सर्जक बनाने की योजना के तहत रेल मंत्री पीयूष गोयल ने सौर ऊर्जा क्षेत्र के मुख्य हितधारकों के साथ बैठक की। उन्होंने रेल पटरियों के साथ-साथ सौर परियोजनाओं की स्थापना के लिये नवोन्मेषी समाधानों पर चर्चा की।
नयी दिल्ली, 27 अगस्त भारतीय रेलवे को 2030 तक शून्य कार्बन उत्सर्जक बनाने की योजना के तहत रेल मंत्री पीयूष गोयल ने सौर ऊर्जा क्षेत्र के मुख्य हितधारकों के साथ बैठक की। उन्होंने रेल पटरियों के साथ-साथ सौर परियोजनाओं की स्थापना के लिये नवोन्मेषी समाधानों पर चर्चा की।
रेल मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को एक बयान में कहा कि जिन कंपनियों ने बुधवार को इस बैठक में भाग लिया, उनमें अडानी, एसीएमई, एनटीपीसी, रिन्यू पावर, हीरो फ्यूचर एनर्जीज, ग्रीनको ग्रुप, एज्योर पावर और टाटा पावर शामिल हैं।
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बयान में कहा गया, ‘‘यह ध्यान देने योग्य है कि भारतीय रेलवे अपनी कर्षण आवश्यकता को पूरा करने के लिये सौर ऊर्जा का उपयोग करने और पूरी तरह से हरित परिवहन माध्यम बनने के लिये प्रतिबद्ध है। इस बैठक में चर्चा के प्राथमिक क्षेत्र रेल पटरियों के साथ-साथ सौर ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना के लिये अभिनव समाधानों पर केंद्रित थे।
इसके अलावा 2030 तक कार्बन उत्सर्जन शून्य करने को लेकर भारतीय रेलवे द्वारा निर्धारित 20 गीगावाट अक्षय ऊर्जा खरीद के लक्ष्य को पाने के लिये खरीद के संभावित उपायों पर भी चर्चा की गयी।’’
बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा परियोजनाएं लगाने में आने वाली चुनौतियों से रेलवे कैसे पार पायेगा, बैठक में इस बारे में भी चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में रेलवे स्टेशनों को सौर ऊर्जा से लैस करने तथा
अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के लिये रेलवे की खाली जमीनों का इस्तेमाल करने के निर्देश दिये थे। भारतीय रेलवे ने उन निर्देशों के मद्देनजर इस दिशा में काम शुरू किया है।
बयान में कहा गया कि यह प्रयास सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने की भारत सरकार के राष्ट्रीय सौर मिशन में भी एक अहम योगदान होगा।
बयान के अनुसार, रेल मंत्रालय ने रेलवे की खाली पड़ी जमीनों का सौर ऊर्जा परियोजना लगाने के लिये बड़े स्तर पर इस्तेमाल करने का निर्णय लिया है। प्रायोगिक तौर पर बीना में 1.7 मेगावाट क्षमता की एक परियोजना सफलतापूर्वक शुरू की गयी है और उसे 25 केवी की कर्षण प्रणाली से जोड़ा गया है।
इसके अलावा कर्षण से इतर के उद्देश्यों में इस्तेमाल के लिये रायबरेली के आधुनिक डिब्बा कारखाने में तीन मेगावाट क्षमता का एक सौर ऊर्जा संयंत्र लगाया गया है। दीवाना में दो मेगावाट तथा भिलाई में 50 मेगावाट क्षमता वाले संयंत्र पर भी काम जारी है।
भारतीय रेलवे ने अपनी खाली जमीनों का इस्तेमाल कर 2030 तक 20 गीगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने की वृहद योजना तैयार की है।
बयान में कहा गया, ‘‘2023 तक शत प्रतिशत विद्युतीकरण की महत्वाकांक्षी योजना के कारण रेलवे की बिजली खपत बढ़कर 2030 तक 33 अरब यूनिट से अधिक हो जाने वाली है। अभी रेलवे की सालाना खपत करीब 21 अरब यूनिट है।’’
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