देश की खबरें | रेलवे डीजल इंजनों को विद्युत इंजनों में तब्दील करने की योजना पर पुनर्विचार कर रहा

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नयी दिल्ली, 10 जुलाई रेलवे डीजल इंजनों को विद्युत इंजनों में तब्दील करने की अपनी महत्वाकांक्षी योजना पर पुनर्विचार कर रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी।

रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष वी. के. यादव ने ऑनलाइन संवाददाता सम्मेलन में कहा कि इस योजना के नफा-नुकसान का पता लगाने के लिये एक उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है।

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रेलवे ने 2018 में कहा था कि वह डीजल इंजन के समूचे बेड़े को उनके नवीनीकरण में आने वाली आधी से भी कम लागत में विद्युत इंजन में तब्दील करने के एक ‘मास्टर प्लान’ पर काम कर रहा है।

पिछले साल फरवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में इस तरह से तब्दील किये गये प्रथम रेल इंजन को हरी झंडी दिखा कर रवाना किया था, जिसे रेलवे ने ‘‘ डीजल इंजन से विद्युत इंजन में तब्दील किया गया दुनिया का पहला रेल इंजन ’’ बताया था।

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यादव ने कहा, ‘‘हमने इस बारे में पता लगाने के लिये एक उच्च स्तरीय समिति गठित की है कि क्या डीजल इंजनों को (विद्युत इंजनों में) तब्दील करना आर्थिक एवं तकनीकी रूप से की जाने वाली सर्वाधिक व्यवहार्य चीज होगी। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘जिन डीजल इंजनों को विद्युत इंजनों में तब्दील किया गया है वे बहुत पुराने हैं और वे करीब पांच-छह साल ही उपयोग में लाये जा सकते थे। उन्हें तब्दील किये जाने पर उन्हें और पांच-दस साल उपयोग में लाया जा सकेगा। साथ ही, अभी हम 12,000, 9,000 अश्व शक्ति (एचपी) क्षमता के डीजल इंजनों का उपयोग कर रहे हैं तथा पुराने इंजन करीब 4,500 एचपी के हैं। हम इन्हें तब्दील किये जाने के नफा-नुकसान का आकलन करने पर काम कर रहे हैं। ’’

उन्होंने कहा कि समिति के 15 अगस्त तक रिपोर्ट सौंपने की उम्मीद है।

अधिकारियों ने बताया कि रेलवे ने अभी तक तीन डीजल इंजनों को विद्युत इंजनों में तब्दील किया है और इसमें से प्रत्येक में करीब दो करोड़ रुपये की लागत आई है। ’’

रेलवे का यह कदम भारतीय रेल का पूर्ण रूप से विद्युतीकरण करने की दिशा में एक कदम है। इससे हर साल करीब 2.83 अरब लीटर ईंधन की खपत घट जाएगी।

यादव ने कहा कि रेलवे इस बारे में भी विचार कर रहा है कि क्या डीजल इंजनों को पड़ोसी देशों को निर्यात किया जा सकता है।

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