देश की खबरें | मुश्किल दौर में बिखरती चली गई राहुल की ‘युवा ब्रिगेड’

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. चुनावी हार और दरकते जनाधार के बीच अब तक सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही कांग्रेस की वह ‘युवा ब्रिगेड’ एक के बाद एक बिखरती चली जा रही है जो कभी राहुल गांधी की खास और पार्टी का भविष्य मानी जाती थी।

नयी दिल्ली, 25 जनवरी चुनावी हार और दरकते जनाधार के बीच अब तक सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही कांग्रेस की वह ‘युवा ब्रिगेड’ एक के बाद एक बिखरती चली जा रही है जो कभी राहुल गांधी की खास और पार्टी का भविष्य मानी जाती थी।

इस युवा ब्रिगेड से नयी विदाई आरपीएन सिंह की है जो उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मंगलवार को भाजपा में शामिल हो गए। इससे एक दिन पहले ही, कांग्रेस ने उन्हें उत्तर प्रदेश चुनाव के लिए स्टार प्रचारक नियुक्त किया था।

आरपीएन सिंह से पहले जितिन प्रसाद ने भाजपा का दामन थामा था और वह फिलहाल राज्य सरकार में मंत्री हैं।

राहुल गांधी के करीबी माने जाने वाले प्रमुख युवा नेताओं के पार्टी छोड़ने का सिलसिला मार्च, 2020 में उस समय हुआ जब ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस को अलविदा कह भाजपा का दामन थाम लिया । नतीजा यह हुआ कि मध्य प्रदेश में 15 साल के बाद बनी कांग्रेस की सरकार 15 महीनों में ही सत्ता से बाहर हो गई।

सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने के कुछ महीने बाद ही एक समय ऐसा आया कि सचिन पायलट कांग्रेस से जुदा होने के मुहाने पर खड़े हो गए, हालांकि आलाकमान के दखल और बातचीत के बाद वह पार्टी में रह गए।

केंद्र में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के समय सिंधिया, पायलट, प्रसाद, आरपीएन सिंह और मिलिंद देवड़ा वे चंद युवा नेता थे जिन्हें राहुल गांधी की ‘युवा ब्रिगेड’ की संज्ञा दी जाती थी। आज इनमें से पायलट और देवड़ा ही कांग्रेस में रह गए हैं।

पिछले साल ही महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सुष्मिता देव ने कांग्रेस को छोड़कर तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया। इससे पहले झारखंड में अजय कुमार, हरियाणा में अशोक तंवर और त्रिपुरा में प्रद्युत देव बर्मन जैसे युवा नेताओं ने कांग्रेस को अलविदा कह दिया था। अजय कुमार की अब कांग्रेस में वापसी हो चुकी है।

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