देश की खबरें | राहुल गांधी के पास मानहानि की शिकायत पर शीघ्र निर्णय पाने का वैध अधिकार है : उच्च न्यायालय

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. बंबई उच्च न्यायालय ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पास राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के खिलाफ उनकी कथित टिप्पणियों के लिए 2014 की मानहानि की शिकायत पर गुण-दोष के आधार पर शीघ्र निर्णय पाने का वैध अधिकार है।

मुंबई, 16 जुलाई बंबई उच्च न्यायालय ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पास राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के खिलाफ उनकी कथित टिप्पणियों के लिए 2014 की मानहानि की शिकायत पर गुण-दोष के आधार पर शीघ्र निर्णय पाने का वैध अधिकार है।

न्यायमूर्ति पृथ्वीराज चह्वाण की एकल पीठ ने 12 जुलाई को दिए आदेश में कहा कि संविधान का अनुच्छेद 21 हर किसी को त्वरित सुनवाई का अधिकार प्रदान करता है और एक स्वतंत्र व निष्पक्ष सुनवाई आवश्यक है।

अदालत ने आरएसएस कार्यकर्ता को आपराधिक मानहानि की एक लंबित शिकायत में नए और अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने की अनुमति देने वाले मजिस्ट्रेट के आदेश को रद्द करने की राहुल की याचिका को स्वीकार करते हुए यह टिप्पणी की।

इस आदेश की विस्तृत प्रति मंगलवार को उपलब्ध हुई।

आरएसएस कार्यकर्ता राजेश कुंटे ने 2014 में भिवंडी में मजिस्ट्रेट अदालत में मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें दावा किया गया था कि कांग्रेस नेता ने एक भाषण के दौरान झूठा और अपमानजनक बयान दिया था कि महात्मा गांधी की हत्या के लिए संघ जिम्मेदार है।

मजिस्ट्रेट अदालत ने 2023 में कुंटे को राहुल गांधी के भाषण की प्रतिलिपि प्रस्तुत करने की अनुमति दी। राहुल का भाषण 2014 में दायर उनकी उस याचिका का हिस्सा था, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ जारी समन को रद्द करने की मांग की थी।

कुंटे ने तर्क दिया कि प्रतिलिपि को अपनी याचिका में शामिल करके, राहुल गांधी ने "स्पष्ट रूप से भाषण और इसकी सामग्री का स्वामित्व प्राप्त कर लिया है।’’

कांग्रेस नेता ने मजिस्ट्रेट के आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी

न्यायमूर्ति चह्वाण ने अपने आदेश में कुंटे पर सवाल उठाया और कहा कि उनके आचरण के कारण इस मामले में ‘‘अनावश्यक रूप से देरी हो रही है तथा उसे लंबा खींचा’’ जा रहा है।

उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘प्रतिवादी संख्या 2 (कुंटे) भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के मद्देनजर शिकायत के गुण-दोष के आधार पर उस पर जल्द से जल्द निर्णय पाने के याचिकाकर्ता (राहुल गांधी) के वैध अधिकार को रोकने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं।’’

संविधान का अनुच्छेद 21 त्वरित सुनवाई का अधिकार प्रदान करता है।

उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के आदेश को रद्द करते हुए कहा था कि ऐसा प्रतीत होता है कि मजिस्ट्रेट ने कुंटे को साक्ष्य के रूप में दस्तावेजों पर भरोसा करने की अनुमति देते समय आपराधिक न्यायशास्त्र के मूल सिद्धांत की पूरी तरह से अवहेलना की है।

पीठ ने मजिस्ट्रेट को यह भी निर्देश दिया कि वह शिकायत पर शीघ्र निर्णय लें और उसका निपटारा करें क्योंकि यह एक दशक से लंबित है।

राहुल गांधी ने अपनी याचिका में दावा किया कि 2021 में उच्च न्यायालय की एक अन्य पीठ ने कुंटे को मामले में कोई भी नया दस्तावेज जमा करने की इजाजत नहीं दी थी। हालांकि, इसके बावजूद मजिस्ट्रेट ने शिकायत के हिस्से के रूप में दस्तावेज जमा करने की अनुमति दी।

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि कुंटे को इस स्तर पर नये दस्तावेज प्रस्तुत करने की अनुमति देने वाला मजिस्ट्रेट का आदेश ‘पूरी तरह से अवैध और पूर्वाग्रही’ है।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

संबंधित खबरें

GT vs MI, IPL 2026 30th Match Date And Time: कब और कितने बजे से खेला जाएगा गुजरात टाइटंस बनाम मुंबई इंडियंस के बीच रोमांचक मुकाबला? इस स्टेडियम में भिड़ेंगी दोनों टीमें, यहां जानें वेन्यू समेत मैच से जुड़ी सभी जानकारी

PBKS vs LSG, IPL 2026 29th Match Scorecard: चंडीगढ़ मुकाबले में पंजाब किंग्स ने लखनऊ सुपर जायंट्स को 54 रनों दी पटखनी, लगाया जीत का पंजा; यहां देखें मैच का स्कोरकार्ड

Will MS Dhoni Play in MI vs CSK IPL 2026 Match: मुंबई इंडियंस बनाम चेन्नई सुपरकिंग्स के मुकाबले से पहले बड़ी खबर, क्या आईपीएल 2026 में वापसी करेंगे एमएस धोनी? फिटनेस को लेकर आया अपडेट

Manipur Tension: मणिपुर में फिर बढ़ा तनाव, उखरुल में पूर्व सैनिक समेत दो की हत्या से हालात बिगड़े; संदिग्ध उग्रवादियों पर FIR दर्ज