देश की खबरें | प्रश्नपत्र लीक मामला: यूट्यूब चैनल मालिक को अग्रिम जमानत देने से अदालत का इनकार

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. केरल उच्च न्यायालय ने 11वीं कक्षा के परीक्षा प्रश्नपत्र लीक मामले में एक आरोपी को अग्रिम जमानत देने से बृहस्पतिवार को इनकार कर दिया, जिसके बाद उसने केरल पुलिस की अपराध शाखा के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया।

कोच्चि, छह मार्च केरल उच्च न्यायालय ने 11वीं कक्षा के परीक्षा प्रश्नपत्र लीक मामले में एक आरोपी को अग्रिम जमानत देने से बृहस्पतिवार को इनकार कर दिया, जिसके बाद उसने केरल पुलिस की अपराध शाखा के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया।

न्यायमूर्ति पी वी कुन्हीकृष्णन ने आरोपी शुहैब की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ करने की जरूरत बताई है। अदालत ने उसे जांच अधिकारी के समक्ष आत्मसमर्पण करने और जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया।

उच्च न्यायालय के आदेश के बाद, शुहैब ने कोझिकोड में अपराध शाखा कार्यालय में आत्मसमर्पण कर दिया, जहां उसने संवाददाताओं से कहा कि उसे और उसके यूट्यूब चैनल एम एस सॉल्यूशंस को इस मामले में झूठा फंसाया गया है।

शुहैब ने आरोप लगाया कि एक बड़े मंच ने उसके और उसके चैनल के खिलाफ साजिश रची है।

उच्च न्यायालय ने शुहैब को राहत देने से इनकार करते हुए कहा कि जमानत देने से ‘‘समाज में गलत संदेश जाएगा।’’

अदालत ने अपने आदेश में इस बात पर जोर दिया कि परीक्षाएं निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आयोजित की जानी चाहिए तथा प्रश्नपत्रों का लीक होना उन छात्रों के खिलाफ ‘‘धोखाधड़ी का स्पष्ट मामला’’ होगा, जिन्होंने परीक्षा के लिए लगन से तैयारी की होती है।

इसने कहा, ‘‘इसलिए, शिक्षा प्रणाली में परीक्षाओं की शुचिता को बनाए रखा जाना चाहिए। प्रश्नपत्र लीक होने से परीक्षा प्रक्रिया, अभ्यर्थियों और शिक्षा विभाग पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है। इससे विभाग की विश्वसनीयता को क्षति हो सकती है, छात्रों में चिंता और तनाव उत्पन्न हो सकता है और लीक हुए पेपर तक पहुंच रखने वालों को अनुचित लाभ मिल सकता है।’’

अदालत ने यह भी कहा कि इस मामले में, अभियोजन पक्ष ने विस्तृत जांच की मांग की, जिसके लिए आरोपी से हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता है।

न्यायमूर्ति कुन्हीकृष्णन ने कहा, ‘‘मैं इस समय यह कहने की स्थिति में नहीं हूं कि याचिकाकर्ता (शुहैब) ने अपराध नहीं किया है या उससे हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं है। जांच को कानून के अनुसार आगे बढ़ने दें। याचिकाकर्ता को जांच अधिकारी के समक्ष आत्मसमर्पण करना चाहिए और जांच में सहयोग करना चाहिए।’’ अदालत ने कहा कि प्रश्नपत्र लीक हुआ था या नहीं, यह निर्धारित करने के लिए उसके पास विशेषज्ञता का अभाव है।

इसने कहा कि शिक्षाविदों और शिक्षकों ने कहा है कि प्रश्नपत्र लीक हुए बिना ऐसी सटीक भविष्यवाणियां संभव नहीं होतीं। अदालत ने कहा कि उनके बयानों पर अविश्वास करने का कोई कारण नहीं है।

अदालत ने कहा, ‘‘इन परिस्थितियों में, यह अदालत शिक्षकों और विशेषज्ञों की राय का खंडन नहीं कर सकती, खासकर जमानत आवेदन पर विचार करते समय।’’ अपराध शाखा ने बुधवार को मामले के सिलसिले में एक निजी सहायता प्राप्त स्कूल के चतुर्थ श्रेणी के एक कर्मी को गिरफ्तार किया, जिससे मामले में गिरफ्तारियों की कुल संख्या तीन हो गई। अपराध शाखा के अनुसार, उक्त कर्मी पर प्रश्नपत्रों को यूट्यूब चैनल पर लीक करने का संदेह है। गिरफ्तार किए गए अन्य दो व्यक्ति शिक्षक हैं जिन्होंने इस प्लेटफॉर्म पर पढ़ाया था।

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